जौनपुर। धर्म भले अलग हों, लेकिन कला और संस्कृति लोगों को जोड़ने का काम करती हैं। शाहगंज के भादी ग्रामसभा निवासी 65 वर्षीय सुब्बन खां का परिवार इसकी मिसाल पेश कर रहा है। उनका परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से दशहरे पर रावण का पुतला बनाता आ रहा है। इस वर्ष भी सुब्बन खां 75 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार कर रहे हैं।
सुब्बन खां के अनुसार, उनके दादा ने रावण का पुतला बनाने की परंपरा शुरू की थी। इसके बाद उनके पिता ने इसे आगे बढ़ाया और अब वह इस विरासत को संभाल रहे हैं। इस बार पुतले का निर्माण 12 अक्टूबर से शुरू हुआ है, जिसे 19 अक्टूबर की रात तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसे बनाने में बांस, खप्पची और पुआल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुब्बन खां की कारीगरी दशहरे तक सीमित नहीं है। वह शाहगंज के ऐतिहासिक भरत मिलाप में निकलने वाली लागों का निर्माण भी कर चुके हैं। उनकी बनाई लागों को पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उनका परिवार अपनी कला के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। यह विरासत बताती है कि कला और संस्कृति धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करती हैं।
