बरेली। दो भाग में बंटे हुए जिला हॉस्पिटल में जिला अस्पताल परिसर में एक छत के नीचे सभी विभाग लाने की
दिशा में शासन ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेज कर जीर्ण शीर्ण भवन को तोड़े जाने की जानकारी मांगी है । उत्तर प्रदेश के अधीक्षण अभियंता चिकित्सा एवं स्वस्थ स्वास्थ्य सेवाएं रवि कुमार ने बरेली के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्रक संख्या 14फ़/नि अ= 8 /2026= 2027 दिनांक 22 जून 2026 का पत्र भेजकर जिला हॉस्पिटल की भूमि का साईट प्लान, कौन कौन से भवन तोड़े जाने योग्य हैं, उनका मूल्यांकन लोक निर्माण विभाग से कराने का प्रस्ताव, किन किन भवनों को स्थानांतरित कर एक ही भवन में एकीकृत किया जाना है, का निरीक्षण कर प्रस्ताव भेजने को कहा है ताकि महाराणा प्रताप जिला चिकित्सालय, बरेली में सभी भवन एक छत के नीचे आ सके। स्मरण रहे मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार निर्भय सक्सेना के उपरोक्त विषयक पत्र पर उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डा अरुण कुमार ने प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी को अपने कवरिंग लेटर के साथ भेजा था। जिस पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने चिकित्सा महानिदेशक को पत्र भेज कर प्रदेश शासन को इसकी जानकारी मांगी थी। जिसकी प्रति निर्भय सक्सेना को भी भेजी गई थी।
स्मरण रहे उत्तर प्रदेश में बीजेपी का गढ़ माना जाने बाला बरेली ही एक मात्र ऐसा जिला है जिसमें आज तक सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं खुल सका है। कई निजी मेडिकल कॉलेज होने के बाद भी बरेली महंगी चिकित्सा होने से आम आदमी के लिये बरेली चिकित्सा क्षेत्र में काफी पिछड़ा हुआ है। स्मरण रहे बरेली में कई निजी मेडिकल कॉलेज कॉलेज चलाने वाले उसके चिकित्सा जगत के भीष्म पितामह संस्थापक भी महीने भर दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती होकर भी अपने प्राण नहीं बचा पाए थे।
पत्रकार निर्भय सक्सेना ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि बरेली में बांसमंडी का सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज जिला अस्पताल परिसर में इंदिरा मार्केट के पीछे वाली साइड में लाया जाए। बरेली का स्पाइनल इंजरी सेंटर भी अब बीमार अवस्था में पड़ा है। इसके अलावा जिला अस्पताल के दोनों साइड में खाली भूमि पर सपा सरकार में बने महिला हॉस्पिटल की तर्ज पर बहुमंजिला भवन निर्माण कर एक छत के नीचे सभी मेडिकल सेवाएं होने से जनता को राहत मिलेगी। परिसर में लगी महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थल को भी हरियाली युक्त पार्क में तैयार किया जाए। जिला अस्पताल के दोनों गेट को नई सड़क मार्ग से यू शेप का आने जाने का मार्ग बना बन जाने से एंबुलेंस के एक ही गेट पर जम में फंसने से राहत मिल सकेगी ।
इस संबंध में बरेली के जन प्रतिनिधियों को पत्र/मेल भी भेजे गए थे। जिला अस्पताल परिसर में बने सभी प्रशासनिक कार्यालय एवं जिला परिषद वाली साइड में पुराने गिरताऊ आवास भवन को नए भवन में सुनियोजित ढंग से बनाया जाए जिससे अस्पताल परिसर में भूमिगत वाहन पार्किंग की भी भरपूर जगह उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही बांसमंडी का सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज को भी जिला अस्पताल परिसर में इंदिरा मार्केट के पीछे वाली साइड में लाया जाए। यहाँ टाइप 2 एवं टाइप 5 एवं डाक्टरों के बहुमंजिला आवास एवं कार्यालय भी दूसरी साइट में बनाए जाएं।
बरेली सरकारी चिकित्सा क्षेत्र में अभी भी जिला बरेली काफी पिछड़ा हुआ ही है। बरेली ही एकमात्र जिला है जहां सरकारी मेडिकल कॉलेज तक नहीं खुल पाया है। 300 बेड हॉस्पिटल भी अव्यस्था एवं डॉक्टरों के अभाव में सफेद हाथी बना हुआ है। उत्तर प्रदेश में बरेली के लोगों को निजी अस्पताल में महंगा इलाज को जाना होता है । बरेली में हाल में ही बिना लाभकारी योजना के बना यूनानी कॉलेज भी सफेद हाथी बना हुआ है । एम्स की वर्षो पुरानी मांग फाइल में दबी पड़ी है।
पत्रकार निर्भय सक्सेना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी को मेल भेजकर एवं बरेली के जन प्रतिनिधियों को बरेली की जनता को सरकारी चिकित्सा की बेहतर सेवा देने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज, एम्स जैसा हॉस्पिटल देने की मांग की है। साथ ही एक छत के नीचे सभी सरकारी मेडिकल सेवाएं लाने की भी मांग जनहित में उठाई है ।
उत्तर प्रदेश में बी जे पी का गढ़ बरेली रहा है। जहां बी जे पी के वर्तमान में 1 सांसद, 7 विधायक, 2 एम एल सी, मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष बीजेपी के दूसरे कार्यकाल में भी पदों पर आसीन हैं। खेद के साथ कहना पड़ रहा ही कि आम जनता को सरकारी मेडिकल सेवा देने में बरेली जिला अभी भी काफी पीछे है। जिसका कारण यहां निजी मेडिकल कॉलेज को राजनीतिक जीवनदान देने से आम जनता को इलाज के लिए दिन पर दिन महंगा इलाज लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
स्मरण रहे बरेली ही एक मात्र ऐसा जिला है जहां 77 वर्ष बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेज अभी तक नही खुल सका है। सरकारी यूनानी कॉलेज को सपा शासन में हजियापुर में जगह ही मिली है पर हॉस्पिटल अभी सफेद हाथी की तरह खड़ा हुआ है कब शुरू होगा पता नहीं। बांस मंडी का आयुर्वेदिक कॉलेज बिना कैम्पस के एक दरबे में सिमटा पड़ा है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम का कलेक्टर बक गंज में 100 बेड अस्पताल का निर्माण भी कछुआ गति से चल रहा है। महानगर कालोनी के पास बना उत्तर प्रदेश का एकमात्र स्पाइनल इंजरी सेंटर भी मरणासन्न अवस्था में अपनी धीरे धीरे सांसे ले रहा है ।
अपने भेजे मेल मे निर्भय सक्सेना ने कहा ही की मेरा विनम्र सुझाव है की जिला हॉस्पिटल के टी बी हॉस्पिटल एवम उससे सटे पुराने गिरताऊ भवन तोड़कर उस बड़े परिसर में 100 बेड का एक नया आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, कार्यालय, आवास परिसर एवं जिला हॉस्पिटल परिसर में बनी अवैध दुकानों, जो वर्ष 1975 से पहले हॉस्पिटल बाउंड्री के पास मात्र लकड़ी के खोखे ही बने थे, का भी मल्टी स्टोरी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाए ताकि बरेली की घनी आबादी को आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ शहर के बीच ही पूर्ववत मिलता रहे । राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की प्रधानचार्य का कहना है कि आयुर्वेदिक कॉलेज के लिए शहर में ही नया भवन बने। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने स्वीकारा कि जिला हॉस्पिटल का परिसर बेहतर विकल्प हो सकता है । बिथरी से बीजेपी विधायक डॉ राघवेंद्र शर्मा 15 किलोमीटर दूर इसे रामगंगा के पास बने स्कूल में शिफ्ट करने की मांग कर चुके थे। बाद में उन्होंने इसे यूनानी हॉस्पिटल में लाने की बात कही। अब सुना है उसकी इस आशय वाली पत्रावली रेंगने भी लगी है। बीजेपी कैंट विधायक संजीव अग्रवाल भी कहते हैं कि उनके विधान सभा क्षेत्र में आने वाला आयुर्वेदिक हॉस्पिटल को अपने विधानसभा एरिया में ही जिला अस्पताल में नया बहुमंजिला भवन दिलाने के लिए उनका प्रयास होगा। बीजेपी सांसद छत्रपाल गंगवार को भी इस के लिए पत्र देकर अवगत कराया गया है ।
निर्भय सक्सेना
मोबाइल 9411005249 8077710362
निवास 113,बजरिया पूरन मल, पटवा गली कॉर्नर, बरेली 243003


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