देश भर से जुटे विशेषज्ञों ने साझा किये आधुनिक उपचार के तौर-तरीके
ऑटिज्म एवं एडीएचडी को लेकर चिकित्सकों को किया गया जागरूक
आईएपी जौनपुर की राष्ट्रीय संगोष्ठी में वैज्ञानिक मूल्यांकन
शुरुआती हस्तक्षेप एवं अभिभावकों की भूमिका पर जोर
जौनपुर। बच्चों में ऑटिज्म, एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर), विकास में देरी, सीखने की समस्या और व्यवहार संबंधी विकारों की समय पर पहचान बेहद जरूरी है। शुरुआती अवस्था में समस्या की पहचान कर वैज्ञानिक मूल्यांकन और उचित हस्तक्षेप किया जाए तो बच्चे के विकास और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) जौनपुर की ओर से नगर के एक होटल में ‘डेवलपमेंटल पीडियाट्रिक्स एवं बिहेवियर डिसऑर्डर्स’ विषय पर राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संगोष्ठी की गयी।
इस मौके पर मुख्य वक्ता विकासात्मक एवं व्यवहार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर दलवाई ने कहा कि बच्चे के विकास में दिखाई देने वाले असामान्य संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऑटिज्म, एडीएचडी, सीखने में कठिनाई अथवा विकासात्मक देरी की जितनी जल्दी पहचान होगी, उतनी ही जल्दी आवश्यक उपचार और हस्तक्षेप शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक मूल्यांकन और उपचार की विभिन्न पद्धतियों की जानकारी दी।
संगोष्ठी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किये जहां वक्ताओं ने बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता और विकास के विभिन्न चरणों पर नजर रखने के साथ अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार चिकित्सक, अभिभावक और अन्य विशेषज्ञों के समन्वय से समग्र उपचार जरूरी है।
मुख्य अतिथि पूर्व विधायक डॉ. एचपी सिंह और विशिष्ट अतिथि आईएमए अध्यक्ष डॉ. शुभा सिंह ने आयोजन को चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। अध्यक्षता डॉ. विनोद सिंह एवं डॉ. अशोक राय ने किया। आईएपी अध्यक्ष डॉ. सरोज यादव, सचिव डॉ. विपुल सिंह और कोषाध्यक्ष डॉ. डीके यादव ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तेज सिंह, डॉ. बीडी भाटिया (पूर्व निदेशक बीएचयू), डॉ. फैज अहमद, डॉ. अजीत कपूर, डॉ. क्षितिज शर्मा, डॉ. अजह़र जाफरी, डॉ. मुकेश शुक्ला, डॉ. अशोक यादव, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. विवेक चेतल, डॉ. अरुण मिश्रा, डॉ. गुंजन, डॉ. राजेश, डॉ. जयेश, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. चांद, डॉ. फारूक, डॉ. लालजी प्रसाद, डॉ. जाहिद, डॉ. अजफर, डॉ. जोरार, डॉ. जफर तारिक, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. एएन सिंह, डॉ. मुमताज समेत तमाम चिकित्सक उपस्थित रहे।
इस मौके पर मुख्य वक्ता विकासात्मक एवं व्यवहार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर दलवाई ने कहा कि बच्चे के विकास में दिखाई देने वाले असामान्य संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऑटिज्म, एडीएचडी, सीखने में कठिनाई अथवा विकासात्मक देरी की जितनी जल्दी पहचान होगी, उतनी ही जल्दी आवश्यक उपचार और हस्तक्षेप शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक मूल्यांकन और उपचार की विभिन्न पद्धतियों की जानकारी दी।
संगोष्ठी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किये जहां वक्ताओं ने बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता और विकास के विभिन्न चरणों पर नजर रखने के साथ अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार चिकित्सक, अभिभावक और अन्य विशेषज्ञों के समन्वय से समग्र उपचार जरूरी है।
मुख्य अतिथि पूर्व विधायक डॉ. एचपी सिंह और विशिष्ट अतिथि आईएमए अध्यक्ष डॉ. शुभा सिंह ने आयोजन को चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। अध्यक्षता डॉ. विनोद सिंह एवं डॉ. अशोक राय ने किया। आईएपी अध्यक्ष डॉ. सरोज यादव, सचिव डॉ. विपुल सिंह और कोषाध्यक्ष डॉ. डीके यादव ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तेज सिंह, डॉ. बीडी भाटिया (पूर्व निदेशक बीएचयू), डॉ. फैज अहमद, डॉ. अजीत कपूर, डॉ. क्षितिज शर्मा, डॉ. अजह़र जाफरी, डॉ. मुकेश शुक्ला, डॉ. अशोक यादव, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. विवेक चेतल, डॉ. अरुण मिश्रा, डॉ. गुंजन, डॉ. राजेश, डॉ. जयेश, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. चांद, डॉ. फारूक, डॉ. लालजी प्रसाद, डॉ. जाहिद, डॉ. अजफर, डॉ. जोरार, डॉ. जफर तारिक, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. एएन सिंह, डॉ. मुमताज समेत तमाम चिकित्सक उपस्थित रहे।
