गारोपुर में दो बच्चों के जल प्रवाह के साथ गम में डूबा गांव, अफसरों ने चार-चार लाख रुपये की सहायता का दिया भरोसा
बरसठी | क्षेत्र के गारोपुर गांव में पानी से भरे गड्ढे में डूबकर दो मासूमों की मौत के बाद गुरुवार को पूरा गांव गम में डूबा रहा। पोस्टमार्टम के बाद दोनों बच्चों के शव घर नहीं लाए गए, बल्कि परिजनों ने उनका नदी में जल प्रवाह कर दिया। एक-दूसरे के पड़ोस में रहने वाले दोनों परिवारों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा। ग्रामीणों की जुबान पर एक ही सवाल था कि खुले गड्ढों और कुओं से लगातार हो रहे हादसों के बाद भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे हैं। बुधवार शाम घर से करीब 300 मीटर दूर सबमर्सिबल के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में शिवा (6) पुत्र वीरेंद्र बिंद और आरव (5) पुत्र अनिल बिंद के शव उतराते मिले थे। परिजन दोनों को तत्काल निजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। देर रात पुलिस ने पंचनामा भरकर दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद दोनों मासूमों का नदी में जल प्रवाह कर दिया गया। शिवा के पिता वीरेंद्र बिंद वाराणसी में नाश्ते की दुकान चलाते हैं। हादसे की सूचना मिलते ही वह देर रात बदहवास हालत में गांव पहुंचे। वहीं मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले अनिल बिंद के घर भी मातम पसरा रहा। दोनों परिवार पड़ोसी हैं। दोनों मासूम हमउम्र थे, साथ खेलते थे और पारिवारिक रिश्ते में चचेरे भाई भी लगते थे। शिवा दो भाइयों और चार बहनों में सबसे छोटा था, जबकि आरव अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। ग्रामीणों का कहना था कि दोनों हर समय साथ रहते, साथ खेलते थे और नियति ने दोनों को एक साथ ही छीन लिया। परिजनों की चीख-पुकार सुन मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। घटना की सूचना पर एसडीएम नवीन कुमार, क्षेत्राधिकारी विजय चौधरी, तहसीलदार रवि रंजन, थाना प्रभारी जयप्रकाश यादव, मीरगंज थाना प्रभारी अरविंद सिंह, राजस्व विभाग की टीम और पुलिस बल देर रात तक गांव में मौजूद रहा। अधिकारियों ने परिजनों को ढांढस बंधाया। एसडीएम नवीन कुमार ने बताया कि दोनों पीड़ित परिवारों को शासन की ओर से दैवीय आपदा राहत मद के तहत चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार जिस गड्ढे में दोनों मासूम डूबे, उसे गांव के ही एक व्यक्ति ने सबमर्सिबल लगाने के लिए खुदवाया था।लगातार बारिश के कारण गड्ढा पूरी तरह पानी से भर गया था। हालांकि किसी पक्ष की ओर से तहरीर न मिलने के कारण अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। गौरतलब है कि बीते छह मई को भी इसी गांव की मुस्लिम बस्ती में घर से करीब 50 मीटर दूर स्थित खुले कुएं में गिरने से एक चार वर्षीय मासूम की मौत हो गई थी। तीन महीने के भीतर खुले कुएं और पानी से भरे गड्ढे में डूबने से तीन मासूमों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि पहले हादसे के बाद खुले गड्ढों और कुओं की घेराबंदी सुनिश्चित की गई होती तो इस बार दो मासूमों की जान शायद बच सकती थी। ग्रामीणों ने ऐसे सभी खुले गड्ढों और कुओं को तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है। इस संबंध में थानाध्यक्ष जयप्रकाश यादव ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। दोनों शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया और आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।
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