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Jaunpur News : एक छोटी सी कोशिश मगर किसी के लिये पूरी जिन्दगी...

Naya Savera Network

इसी ध्येय के साथ दिव्यांशु के पहले रक्तदान से मरीज को मिली जिन्दगी


जौनपुर। 'एक छोटी सी कोशिश मगर किसी के लिये पूरी जिन्दगी।' इसी ध्येय को लेकर दिव्यांशु अस्थाना जैसे युवा की सोच, ऊर्जा एवं दृष्टिकोण बहुत मायने रखते हैं। इस सोच को लेकर उन्होंने अब तक के जीवन काल में पहली बार रक्तदान किया। गत दिवस एक न्यूज चैनल के बैनर तले आयोजित रक्तदान शिविर में उन्होंने स्वेच्छा से रक्तदान किया। साथ ही यह भी महसूस किया कि पहली बार में आम तौर पर सुई (नीडल) को लेकर थोड़ी घबराहट होती है लेकिन प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह अहसास पूरी तरह से यह सोचकर सामान्य एवं दर्द मुक्त हो जाता है और मन में अनोखी खुशी एवं सुकून होता है कि मेरा दिया हुआ रक्त किसी जरूरतमन्द मरीज की जान बचाने में काम आयेगा।

लगभग 23 वर्षीय दिव्यांशु अस्थाना की खुशी उस समय हिमालय चोटी जैसी बड़ी हो गयी जब उनको यह पता चला कि उनका दिया हुआ रक्त एक महिला मरीज के काम आ गया। अपनी इस खुशी को बयां करने के लिये उनके पास कोई शब्द नहीं है लेकिन फिर भी उन्होंने कहा कि मुझे पहली बार रक्तदान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जो सार्थक हो गया। सच कहूं तो शुरुआत में मन में थोड़ी झिझक एवं डर था लेकिन मेरे पिता संजय अस्थाना ने मुझे इसके लिये प्रेरित किया। बचपन से उन्हें ऐसे नेक कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते देखा है। उन्हीं से मैंने सीखा कि इंसानियत केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से दिखायी जाती है। आज जब मैंने रक्तदान किया तो मुझे गर्व के साथ एक अलग ही आत्मिक संतोष भी महसूस हुआ। रक्तदान केवल खून देना नहीं है, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति को जीवन की नयी उम्मीद देना है। उनका मानना है कि "रक्तदान महादान है, क्योंकि आपके कुछ मिनट किसी के पूरे जीवन की वजह बन सकते हैं।"


बता दें कि दिव्यांशु अस्थाना नगर के खासनपुर मोहल्ले के निवासी पत्रकार संजय अस्थाना के पुत्र हैं जो पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से आर्टिकल में इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी संस्थान में अध्ययनरत हैं। हालांकि सार्वजनिक मंचों पर उनका कोई राजनीतिक, सामाजिक या ऐतिहासिक रिकार्ड नहीं है लेकिन जौनपुर के विकास और यहां के उज्ज्वल भविष्य के लिये उनके व्यक्तिगत विचार स्थानीय स्तर पर सार्थक भूमिका निभा सकते हैं। जौनपुर की प्रगति के लिये शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक उत्थान जैसे मुद्दों पर उनके विचार सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
अवकाशप्राप्त आरपीएफ अधिकारी के भयोहू को मिला लाभ
अपने अब तक के जीवन काल में पहली बार रक्तदान करने वाले युवा दिव्यांशु का रक्त उस महिला मरीज के काम आया जो घर के बाहर काम करने के दौरान घर के ही ट्रैक्टर की चपेट में आकर गम्भीर रूप से घायल हो गयी थी। बता दें कि उक्त मरीज बदलापुर क्षेत्र के सराय त्रिलोकी की निवासी है। उनके अभिभावक आरपीएफ मुम्बई सेण्ट्रल से अवकाशप्राप्त अधिकारी हैं। उक्त महिला के घायल होने के बाद परिजन नगर के नईगंज में स्थित एक निजी अस्पताल लाये जहां डाक्टर ने एक यूनिट ब्लड की आवश्यकता बतायी, क्योंकि घायल होने के बाद रक्त बहने से उक्त महिला काफी कमजोर हो गयी थी। फिलहाल आरपीएफ अधिकारी ने अपने एक रिश्तेदार से कहा तो उन्होंने नगर के एक पत्रकार से सम्पर्क किया। पत्रकार ने अपने एक साथी से चर्चा किया तो गत दिवस आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तवीर दिव्यांशु अस्थाना द्वारा दिया गया रक्त काम आ गया।

दिव्यांशु के पिता 24 बार कर चुके हैं रक्तदान
बता दें कि होनहार दिव्यांशु अस्थाना पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर का छात्र है जिनके पिता संजय अस्थाना मूल रूप से धर्मापुर क्षेत्र के कादीपुर पौना के निवासी हैं जो पिछले कई वर्षों से नगर के खासनपुर मोहल्ले में रहते हैं। दिव्यांशु की माता वन्दना अस्थाना सरस्वती शिशु मन्दिर बारीनाथ में शिक्षिका हैं। बताते चलें कि दिव्यांशु के पिता संजय अस्थाना अब तक के जीवन काल में कुल 24 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्हीं की प्रेरणा से दिव्यांशु ने रक्तदान किया जो लगभग दो सप्ताह के अन्दर ही एक जरूरतमन्द के काम भी आ गया।

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