जौनपुर। पवित्र रमजान माह उपवास, उपासना, सेवा, सामूहिक मिलन और आध्यात्मिक विकास का महीना होता है। रमज़ान में उपवास रखना इस्लाम के 5 स्तम्भों में से एक है। उक्त बातें मुम्बई हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जौनपुर के मां मैहर देवी शक्तिपीठ के प्रधान न्यासी सत्य प्रकाश गुप्ता ने प्रेस को जारी बयान में कही।
उन्होंने आगे कहा कि "रमजान मुबारक है जिसका अर्थ "शुभ रमजान" होता है। साथ ही इसको "रमजान करीम (आपका रमजान उदार हो) भी कह सकते हैं। यह पारम्परिक और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले अभिवादन हैं जो प्रेम, शान्ति और अल्लाह की रहमतों की कामना करते हैं।
उन्होंने कहा कि रोज़ा (उपवास) जिसमें सुबह से शाम तक खाने-पीने और बुराइयों से दूर रहना, नमाज़ और कुरान जिसमें तरावीह जैसी विशेष नमाज़ें और कुरान की तिलावत पर जोर, ज़कात और सदक़ा यानी गरीबों और जरूरतमन्दों की मदद और आत्म-नियंत्रण (सब्र) जिसमें झूठ, गुस्सा और बुरी बातों से बचना शामिल है। यह सब आध्यात्मिक शुद्धि और अल्लाह के करीब जाने का मार्ग है।
अन्त में मैहर मन्दिर के प्रधान न्यासी ने समस्त लोगों से उक्त त्योहारों को आपसी भाईचारा, सौहार्द एवं परम्परागत ढंग से मनाने की अपील किया है।
उन्होंने आगे कहा कि "रमजान मुबारक है जिसका अर्थ "शुभ रमजान" होता है। साथ ही इसको "रमजान करीम (आपका रमजान उदार हो) भी कह सकते हैं। यह पारम्परिक और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले अभिवादन हैं जो प्रेम, शान्ति और अल्लाह की रहमतों की कामना करते हैं।
उन्होंने कहा कि रोज़ा (उपवास) जिसमें सुबह से शाम तक खाने-पीने और बुराइयों से दूर रहना, नमाज़ और कुरान जिसमें तरावीह जैसी विशेष नमाज़ें और कुरान की तिलावत पर जोर, ज़कात और सदक़ा यानी गरीबों और जरूरतमन्दों की मदद और आत्म-नियंत्रण (सब्र) जिसमें झूठ, गुस्सा और बुरी बातों से बचना शामिल है। यह सब आध्यात्मिक शुद्धि और अल्लाह के करीब जाने का मार्ग है।
अन्त में मैहर मन्दिर के प्रधान न्यासी ने समस्त लोगों से उक्त त्योहारों को आपसी भाईचारा, सौहार्द एवं परम्परागत ढंग से मनाने की अपील किया है।
إرسال تعليق