नेवढ़िया, जौनपुर। जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर नेवढ़िया क्षेत्र के हथेरा गांव में स्थित अति प्राचीन हथेरा वीर बाबा का मन्दिर का सावन माह में अपनी एक अलग मान्यता है। लोगों का मानना है कि त्रेता युग में केरारवीर देव द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग करने पर प्रभु श्रीराम द्वारा अपने बाणों से इनके कई खंड कर दिये गये जो क्रमशः पचहटिया, हथेरा, मड़ियाहूं, डोभी, वाराणसी, चंदौली में गिरे एवं उपरोक्त स्थानों पर देवरूप में स्थापित हुये।
सावन के पावन महीने में हथेरा वीर बाबाजी के स्थान पर हर रविवार एवं मंगलवार को दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं आते हैं और दर्शन करके मन्नतें मांगते हैं। भक्तों का मन्नत पूरा हो जाने पर उनके स्थान पर हलवा, पूरी, नारियल, चुनरी, अगरबत्ती, माला, कपूर, लड्डू आदि सामान लेकर दर्शन पूजन करते हैं। नाग पंचमी के बाद जो मंगलवार पड़ता है, उसे बुढ़वा मंगल कहते है। उस दिन हथेरा वीर बाबा जी के प्रांगण में विशाल मेला का आयोजन किया जाता है जहां दर्शन पूजन करने के लिए भक्तों का सुबह से दोपहर तक तांता लगा रहता है।सुरक्षा व्यवस्था में ज्ञान प्रकाश सिंह, लकी उर्फ फूराना, अंकित, रोहित सिंह, उत्कर्ष, गोलू सिंह आदि लोग भक्तों को दर्शन कराते हुए दिखे। केरारवीर देव जी को प्रभु श्रीराम जी द्वारा अपने बाणों से इनके कई खंड कर दिये गये जिसमें से इनका हाथ इस स्थान पर आकर गिरा जिससे इनका नाम हथेरा वीर रखा गया। बुढ़वा मंगल को ज्यातर नई-नई शादी-ब्याह करने वाले युवक व युवतियां दर्शन पूजन करने के लिए दूर-दूर से आते हैं।
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