जौनपुर। जिले के बदलापुर थाने में उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में हल्का लेखपाल, अरेंजर शाहगंज, चकबंदी अधिकारी बदलापुर के चपरासी सहित 7 लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है जिसकी विवेचना की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार बदलापुर थाना क्षेत्र के रैभानीपुर गांव निवासी शिवकुमार दुबे पुत्र मंगल प्रसाद दुबे ने उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दाखिल कर मांग किया था कि हल्का लेखपाल कैलाश, अरेंजर शाहगंज रमेश, चकबंदी अधिकारी बदलापुर के चपरासी मुरारी सहित पारसनाथ, कृष्णकांत, कमलाकांत और चिंतामणि उपाध्याय के विरुद्ध अभिलेखों में हेर—फेर करने का मुकदमा दर्ज किया जाय जिसकी पुष्टि बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी वाराणसी द्वारा 24 3 मार्च को अपने आदेश में की गई है। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी वाराणसी द्वारा 24 मार्च 2025 को पारित अपने आदेश के तहत 5 अगस्त 2010 को अभिलेखों में दर्द फर्जी आदेश को निरस्त करने का भी आदेश दिया गया।
आवेदक ने बताया कि मैंने लक्ष्मीकांत से उनकी जमीन का पंजीकृत बैनामा प्राप्त किया था और जब दाखिल खारिज के लिए प्रार्थना पत्र दिया तो आकर पत्र 23 भाग एक में यह अंकित पाया गया कि मुकदमा नंबर 42 धारा 12 में 5 अगस्त 2010 को यह आदेश हुआ कि चक संख्या 42 में अंकित खातेदार इनरदेई का नाम निरस्त करके पारिवारिक समझौता याददाश्त पत्रक के आधार पर पारसनाथ पुत्र दूधनाथ का नाम बतौर असल काश्तकार अंकित हो जो बिल्कुल फर्जी, कूटरचित व मिथ्या था।
अभियुक्तगण द्वारा आपसी षड्यंत्र व मिलीभगत करके सरकारी अभिलेखों में हेरा—फेरी करते हुए फर्जी पत्रावली तैयार की गई थी, क्योंकि अभियुक्त पारसनाथ, कृष्णकांत व कमलाकांत द्वारा लक्ष्मीकांत के भूमि को कम मूल्य में प्राप्त करना चाहते थे परंतु लक्ष्मीकांत द्वारा अपनी भूमिका माकूल कीमत हम प्रार्थी से प्राप्त करके बैनामा कर किया गया। प्रतिशोध में अभियुक्तगण सांठ—गांठ व फर्जीबाड़े द्वारा एक साथ एक राय होकर छल—कपट करते हुए अभियुक्त चिंतामणि उपाध्याय के साथ सांठ—गांठ करके कूटरचित पत्रावली न्यायालय चकबंदी अधिकारी अतिरिक्त बाद संख्या 43 धारा 12 तारीख फैसला 5 अगस्त 2010 को तैयार कर अन्य अभियुक्तगण चकबंदी कार्यालय व कलेक्ट्रेट के कर्मचारी जिसमें हल्का लेखपाल कैलाश, रमेश अरेंजर शाहगंज, मुरारी चपरासी चकबंदी बदलापुर के सहयोग से गलत इंद्राज कर दाखिल दफ्तर कर दिया।
अभियुक्त मुरारी द्वारा फर्जी पत्रावली में अपने हस्तलेख में मृतक इनरदेई का बयान भी उनके मृत्यु के पश्चात लेकर अपराध किया गया है। आवेदक ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में बदलापुर थाने में हल्का लेखपाल, अरेंजर शाहगंज, चपरासी सहित सात लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार बदलापुर थाना क्षेत्र के रैभानीपुर गांव निवासी शिवकुमार दुबे पुत्र मंगल प्रसाद दुबे ने उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दाखिल कर मांग किया था कि हल्का लेखपाल कैलाश, अरेंजर शाहगंज रमेश, चकबंदी अधिकारी बदलापुर के चपरासी मुरारी सहित पारसनाथ, कृष्णकांत, कमलाकांत और चिंतामणि उपाध्याय के विरुद्ध अभिलेखों में हेर—फेर करने का मुकदमा दर्ज किया जाय जिसकी पुष्टि बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी वाराणसी द्वारा 24 3 मार्च को अपने आदेश में की गई है। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी वाराणसी द्वारा 24 मार्च 2025 को पारित अपने आदेश के तहत 5 अगस्त 2010 को अभिलेखों में दर्द फर्जी आदेश को निरस्त करने का भी आदेश दिया गया।
आवेदक ने बताया कि मैंने लक्ष्मीकांत से उनकी जमीन का पंजीकृत बैनामा प्राप्त किया था और जब दाखिल खारिज के लिए प्रार्थना पत्र दिया तो आकर पत्र 23 भाग एक में यह अंकित पाया गया कि मुकदमा नंबर 42 धारा 12 में 5 अगस्त 2010 को यह आदेश हुआ कि चक संख्या 42 में अंकित खातेदार इनरदेई का नाम निरस्त करके पारिवारिक समझौता याददाश्त पत्रक के आधार पर पारसनाथ पुत्र दूधनाथ का नाम बतौर असल काश्तकार अंकित हो जो बिल्कुल फर्जी, कूटरचित व मिथ्या था।
अभियुक्तगण द्वारा आपसी षड्यंत्र व मिलीभगत करके सरकारी अभिलेखों में हेरा—फेरी करते हुए फर्जी पत्रावली तैयार की गई थी, क्योंकि अभियुक्त पारसनाथ, कृष्णकांत व कमलाकांत द्वारा लक्ष्मीकांत के भूमि को कम मूल्य में प्राप्त करना चाहते थे परंतु लक्ष्मीकांत द्वारा अपनी भूमिका माकूल कीमत हम प्रार्थी से प्राप्त करके बैनामा कर किया गया। प्रतिशोध में अभियुक्तगण सांठ—गांठ व फर्जीबाड़े द्वारा एक साथ एक राय होकर छल—कपट करते हुए अभियुक्त चिंतामणि उपाध्याय के साथ सांठ—गांठ करके कूटरचित पत्रावली न्यायालय चकबंदी अधिकारी अतिरिक्त बाद संख्या 43 धारा 12 तारीख फैसला 5 अगस्त 2010 को तैयार कर अन्य अभियुक्तगण चकबंदी कार्यालय व कलेक्ट्रेट के कर्मचारी जिसमें हल्का लेखपाल कैलाश, रमेश अरेंजर शाहगंज, मुरारी चपरासी चकबंदी बदलापुर के सहयोग से गलत इंद्राज कर दाखिल दफ्तर कर दिया।
अभियुक्त मुरारी द्वारा फर्जी पत्रावली में अपने हस्तलेख में मृतक इनरदेई का बयान भी उनके मृत्यु के पश्चात लेकर अपराध किया गया है। आवेदक ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में बदलापुर थाने में हल्का लेखपाल, अरेंजर शाहगंज, चपरासी सहित सात लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
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