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Jaunpur News : 'उन्मेष' प्रज्ञा प्रवाह ने की एक दिवसीय राष्ट्रीय गोष्ठी

Naya Savera Network

श्नों के कारण ही शोध की प्रक्रिया गतिमान होती है: चन्द्रकान्त जी

जौनपुर। भारत प्रश्नों का देश है। प्रश्न आवश्यक है। प्रश्नों के कारण ही शोध की प्रक्रिया गतिमान होती है। उक्त बातें 'उन्मेष' प्रज्ञा प्रवाह काशी प्राप्त के जौनपुर शाखा द्वारा तिलकधारी महाविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 'सह-व्याख्यान' में बतौर मुख्य वक्ता चंद्रकान्त जी (अखिल भारतीय सह संयोजक प्रज्ञा प्रवाह) ने व्यक्त किया। इसी क्रम में उपनिषदों की चर्चा करते हुए कहा कि 108 उपनिषदों में से एक प्रमुख उपनिषद 'प्रश्नोपनिषद' है जो शिष्य गुरु संवाद और प्रश्न-उत्तर पर ही आधारित है। प्रश्न पूछना भी एक कला है प्रश्न से आप प्रश्न पूछने वाले की गहराई एवं ज्ञान का अनुमान लगा सकते हैं। "पश्चिमी देश रिलिजन और अंपायर पर जैसे विचारधारा पर निर्भर हैं। भारतीय दर्शन में प्रकृति पूजा की विशेषता है। उन्होंने डा. राम मनोहर लोहिया द्वारा लिखित निबंध 'रामकृष्ण और शिव' पर भी चर्चा किया। साथ ही कहा कि हमें शब्दावली का विशेष ध्यान रखना चाहिये—— धर्म रिलिजन नहीं है, राष्ट्र नेशन नहीं है, आत्मा सोल नहीं है, मृत्यु डेथ नहीं है।

विशिष्ट वक्ता तिलकधारी शिक्षक प्रशिक्षण संकाय के अध्यक्ष प्रो. सुधांशु सिन्हा ने कहा कि "शोध नवीन ज्ञान की खोज के साथ वर्तमान के साथ उसे ज्ञान की उपादेयता को सिद्ध करना है। पाश्चात्य शोध तर्क पर आधारित है और भारतीय शोध का उद्देश्य चेतना को जागृत करना और लोक कल्याण की भावना को बढ़ाना है।" संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. हिमांशु सिंह ने भारतीय शोध पद्धति की उपयोगिता पर विशेष बल दिया। मंचस्थ अतिथियों का परिचय प्रज्ञा प्रवाह काशी प्रांत के व्यवस्था प्रमुख डा. कीर्ति सिंह ने कराया।

संगोष्ठी के संयोजक उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के प्रो. संजय सिंह ने विषय प्रवर्तित किया। माध्यमिक शिक्षक संघ जनपद जौनपुर के अध्यक्ष व प्रज्ञा प्रवाह विंध्याचल मंडल के संयोजक संतोष सिंह ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। धन्यवाद एवं आभार ज्ञापन काशी प्रांत के सह संयोजक संतोष त्रिपाठी ने किया। इसके पहले संगोष्ठी का शुभारम्भ मंचस्थ अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं उनके समक्ष दीप प्रज्वलन से किया। दीप प्रज्वलन के समय मां सरस्वती का श्लोक का गान अनुजा निगम ने किया। संगीत विभागाध्यक्ष प्रोत्र सुभाष बिश्नोई ने वंदे मातरम गीत कराया। संगोष्ठी का संचालन आयोजन सचिव असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अवनीश सिंह ने किया। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

संगोष्ठी को सफल बनाने में मुख्य संरक्षक की भूमिका महाविद्यालय के प्रबंधक राघवेंद्र प्रताप सिंह व संरक्षक की भूमिका प्राचार्य प्रोफेसर (डॉक्टर) राम आसरे सिंह की रही। इस अवसर पर प्रज्ञा प्रवाह के जिला संयोजक डा. सतीश पाठक, युवा आयाम सह प्रमुख सनी शर्मा भट्ट, डा. हरिओम त्रिपाठी, प्रो. विजय सिंह, डा. राहुल सिंह, डा. ब्रह्मेश शुक्ला, डा. शैलेंद्र सिंह, मनोज तिवारी, तिलकधारी विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डा. संतोष सिंह, डॉ अजय दुबे, डा. प्रदीप सिंह, प्रबन्धक संजीव सिंह, प्रदीप दुबे, जेपी सिंह, ओम प्रकाश गुप्त, डा. सरला त्रिपाठी, डा. अनीता त्रिपाठी, शिवांश त्रिपाठी सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

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