अध्यक्ष प्रतिनिधि कृष्णा जायसवाल ने राजनीतिक कारणों से धनराशि रुकवाने का लगाया आरोप, मंडल अध्यक्ष मिथलेश गिरी ने अनियमितताओं की जांच को बताया वजह
केराकत, जौनपुर। नगर पंचायत केराकत में प्रस्तावित करीब पांच करोड़ रुपये की विकास राशि को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि कृष्णा जायसवाल उर्फ गोलू ने भाजपा के मंडल अध्यक्ष मिथलेश गिरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से नगर के विकास कार्यों में बाधा डाली गई और शासन स्तर से प्रस्तावित विकास राशि रुकवा दी गई। इस संबंध में उनका एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद नगर में राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
अध्यक्ष प्रतिनिधि के आरोपों के मुताबिक, नगर पंचायत में विभिन्न विकास कार्यों के लिए करीब पांच करोड़ रुपये की धनराशि प्रस्तावित थी। इस धनराशि से सड़क और नाली निर्माण, शवदाह स्थल का सुंदरीकरण, तालाबों के सुधार तथा पेयजल व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण कार्य कराए जाने थे। उनका कहना है कि धनराशि रुकने के कारण इन विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
मंडल अध्यक्ष पर शासन और मंत्री को गलत जानकारी देने का आरोप
कृष्णा जायसवाल ने आरोप लगाया कि संबंधित भाजपा मंडल अध्यक्ष ने शासन और मंत्री के समक्ष नगर पंचायत अध्यक्ष को समाजवादी पार्टी समर्थित बताते हुए गलत जानकारी दी। उनका दावा है कि इसी वजह से नगर के विकास के लिए प्रस्तावित धनराशि उपलब्ध नहीं हो सकी।
अध्यक्ष प्रतिनिधि ने कहा कि नगर पंचायत के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजे गए थे। धनराशि मिलने के बाद दीनदयाल योजना और वंदन योजना के तहत सड़क एवं नाली निर्माण समेत अन्य विकास कार्य प्रस्तावित थे। इसके अलावा शवदाह स्थल के सुंदरीकरण, तालाबों के सुधार और पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने की भी योजना थी। उनका आरोप है कि राजनीतिक कारणों से इन कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई।
चुनावी लाभ के लिए विकास रोकने का आरोप
कृष्णा जायसवाल ने कहा कि नगर में विकास कार्य पूरे होने की स्थिति में इसका राजनीतिक लाभ नगर पंचायत नेतृत्व को मिल सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी राजनीतिक संभावना को देखते हुए विकास राशि रोकने का प्रयास किया गया। उन्होंने आशंका जताई कि विकास कार्य पूरे होने से आगामी चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
उनका कहना है कि नगर का विकास किसी दल की राजनीति से ऊपर होना चाहिए। जनता के हित से जुड़े कार्यों के लिए स्वीकृत धनराशि को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाना नगरवासियों के हित में नहीं है।
मंडल अध्यक्ष ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर भाजपा मंडल अध्यक्ष मिथलेश गिरी ने कृष्णा जायसवाल के आरोपों को राजनीतिक भेदभाव से जोड़ने से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा केराकत के विकास के लिए हमेशा प्रयासरत रही है। उनके अनुसार शासन की मंशा के अनुरूप नगर के विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति हुई थी और धनराशि भी उपलब्ध कराई गई थी।
मिथलेश गिरी ने कहा कि नगर प्रतिनिधि के करीब तीन वर्ष के कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों को लेकर उनके ही कुछ सभासदों की ओर से शिकायतें की गई थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जांच कराने का अनुरोध किया गया।
जांच में अनियमितताओं का दावा
भाजपा मंडल अध्यक्ष के अनुसार, शिकायतों के आधार पर हुई जांच में विकास कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें सामने आईं। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में नियमों और प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। उनका कहना है कि इन्हीं शिकायतों और जांच की प्रक्रिया के चलते शासन स्तर से प्रस्तावित विकास राशि को रोकने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कुछ सभासदों की शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके सुझावों को नजरअंदाज किए जाने, सभासदों को धमकी दिए जाने तथा नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी किए जाने जैसी शिकायतें भी अधिकारियों के समक्ष रखी गई थीं।
‘राजनीतिक भेदभाव नहीं, पारदर्शिता है उद्देश्य’
मिथलेश गिरी ने कहा कि विकास राशि रोकने के पीछे किसी प्रकार का राजनीतिक भेदभाव नहीं है। भाजपा का उद्देश्य नगर पंचायत में पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यदि विकास कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
नगर में गरमाया राजनीतिक माहौल
करीब पांच करोड़ रुपये की प्रस्तावित विकास राशि को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि और भाजपा मंडल अध्यक्ष के बीच सामने आए आरोप-प्रत्यारोप ने केराकत की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर अध्यक्ष प्रतिनिधि इसे राजनीतिक हस्तक्षेप बताते हुए विकास में बाधा डालने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं भाजपा मंडल अध्यक्ष इसे शिकायतों और जांच से जुड़ा प्रशासनिक निर्णय बता रहे हैं।
फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों के बीच असली स्थिति जांच और शासन स्तर पर लिए गए निर्णय से ही स्पष्ट होगी। मामला सार्वजनिक चर्चा में आने के बाद नगरवासियों की नजर अब इस बात पर है कि प्रस्तावित विकास राशि को लेकर शासन स्तर पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है और जांच में सामने आई शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है।