कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. सुमन सिंह तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. नीलू सिंह, डॉ. सुषमा मिश्रा एवं चेतना सिंह रहीं। गोष्ठी का शुभारंभ अध्यक्ष अर्चना चौहान ने किया। छात्रा मेंहदी ने सरस्वती वंदना की सुंदर प्रस्तुति देकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
काव्य गोष्ठी का कुशल संचालन डॉ. मधु पाठक ने किया। इस दौरान कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकार, नारी शक्ति, स्वतंत्रता और प्रकृति के विविध रंगों को प्रस्तुत किया।
डॉ. सुषमा मिश्रा ने ‘पिया तनी बचवा के खेलावा करा, घुनघुना बजावा करा ना’ रचना प्रस्तुत की। डॉ. नीलू सिंह ने ‘आवा आजादी के अमृत महोत्सव मनाईं सखी, देर ना लगाईं सखी ना’ के माध्यम से स्वतंत्रता एवं राष्ट्रप्रेम की भावना व्यक्त की। डॉ. सुमन सिंह ने ‘आई गयी बरखा बहार हो’ रचना प्रस्तुत कर प्रकृति के मनोहारी स्वरूप को शब्द दिए।
इसी क्रम में चेतना सिंह ने ‘क्या कहती हो नारी?’ रचना के माध्यम से नारी के भाव, अधिकार और सामाजिक भूमिका को स्वर दिया। डॉ. मधु पाठक ने ‘तिरंगा’ शीर्षक रचना प्रस्तुत कर राष्ट्रप्रेम की भावना को अभिव्यक्त किया।
कवयित्रियों की रचनाओं ने ऑनलाइन उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मधु पाठक ने सभी अतिथियों, कवयित्रियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन सौहार्दपूर्ण एवं साहित्यिक वातावरण में सम्पन्न हुआ।
