जौनपुर। प्रतिबंधित मांझे से घायल हुए अधिवक्ता आशीष शुक्ला की निगरानी याचिका अपर सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रताप यादव ने स्वीकार कर ली है। इस फैसले के बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा मामले को परिवाद के तौर पर दर्ज करने का आदेश निरस्त हो गया है। अब आरोपितों के खिलाफ कोर्ट के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता आशीष शुक्ला ने अपने साथी अधिवक्ता विकास तिवारी के माध्यम से यह याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि 13 जनवरी 2025 को वह और अधिवक्ता शिवराज यादव शास्त्री पुल से गुजर रहे थे, तभी कुछ अज्ञात लोगों द्वारा प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाई जा रही थी। इसी दौरान मांझा उनकी गर्दन और चेहरे में फंस गया, जिससे दोनों अधिवक्ताओं को गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद अधिवक्ता आशीष शुक्ला ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोपितों के खिलाफ लाइन बाजार थाने में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसे परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए अधिवक्ता आशीष ने निगरानी याचिका दाखिल की। याचिका में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई विधिक प्रावधानों का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। अब अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा याचिका स्वीकार किए जाने के बाद मामले में पुलिस को एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई करने का निर्देश मिलेगा।
Jaunpur News : प्रतिबंधित मांझे से घायल अधिवक्ता मामले में निगरानी याचिका स्वीकार, एफआईआर के आदेश
byTechnical Team
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