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Jaunpur News : 'अंगद' की तरह पैर जमाये बैठे हैं रसूखदार कर्मी, 'चढ़ावे' के खेल में स्थानान्तरण नीति ढेर

Naya Savera Network
 

जौनपुर। भीषण गर्मी के मई—जून के महीने उन सरकारी सेवकों के लिये बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं जो लम्बे समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं। सूबे की योगी सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिये हर साल कड़क स्थानान्तरण नीति जारी करती है, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके लेकिन सरकार की यह जीरो टॉलरेंस वाली नीति जौनपुर के कृषि विभाग की चौखट पर आकर दम तोड़ देती है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यहां 'अंगद' की तरह पैर जमाये आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो ये कर्मी शासन स्तर पर ट्रांसफर लिस्ट बनने से पहले ही प्रदेश मुख्यालय (डायरेक्ट्रेट) में बैठे अपने 'आकाओं' को चढ़ावा चढ़ाकर अपनी कुर्सी सुरक्षित कर लेते हैं और फिर जिले में आकर रौब गालिब करते हैं।

तीन दशक से एक ही विभाग का 'मोह', कागज पर दिखायी सम्बद्धता
अंजनी उपाध्याय नामक शख्स डीडीएजी कार्यालय में 23 मार्च 1991 से 6 अप्रैल 2018 तक आशुलिपिक पद पर रहा है। वैक्तिक सहायक पद पर प्रोन्नत होने के बाद भी इनका मोह इस कार्यालय से नहीं छूटा। काफी हो-हल्ले के बाद 6 जुलाई 2024 से 27 जून 2025 तक इनका तबादला प्रशासनिक आधार पर उप कृषि निदेशक भूमि संरक्षण कार्यालय वाराणसी किया गया था लेकिन तथ्यों को छिपाकर अपने रसूख के बल पर यह कर्मी पुन: जौनपुर की मुख्य कुर्सी पर काबिज हो गया। कार्यवाही से बचने के लिये वाराणसी में सिर्फ 3 दिन कागज पर सम्बद्धता (अटैचमेंट) दिखायी गयी जिससे पुलिस अधीक्षक उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान वाराणसी के जांच को प्रभावित कर सके। इसके पहले भी 2018 से 2019 तक उन्होंने वाराणसी में तबादला कराकर जौनपुर में ही सेवा दी लेकिन मजे की बात यह है कि इनका गृह जनपद जौनपुर ही है।

अमित मिश्र एवं प्रदीप मिश्र को भी जान लें...
इसी तरह जौनपुर के ही अमित मिश्र व प्रदीप मिश्र भी हैं। अमित डीडीएजी कार्यालय में 17 अप्रैल 2019 और प्रदीप 2 नवम्बर 2002 से लगातार इसी जिले में जमे हैं। यहीं रहते हुये इन दोनों की पदोन्नति भी हो गयी और पटल भी वही रहा। इसके अलावा अन्य दीर्घकालिक 'कब्जेदार' में आजमगढ़ निवासी सुरेन्द्र शर्मा (29 जुलाई 1999), सैय्यद मुजफ्फर अली (21 नवम्बर 2005), संजय तिवारी (30 सितंबर 2009) और मनोज यादव (1 अप्रैल 2011 से) जिले के कृषि विभाग में अपनी जड़ें मजबूत किये हुये हैं।

 कृषि अधिकारी कार्यालय में 23 साल से 'राज', लाइसेंसों में फर्जीवाड़े की आशंका
वाराणसी के मूल निवासी विजय सिंह ने जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में बीज व उर्वरक पटल पर 21 मार्च 2003 से कब्जा जमाया हुआ है। हास्यास्पद स्थिति यह है कि वर्ष 2012 में वरिष्ठ सहायक पद पर पदोन्नति होने के बाद भी इनका गैर-जनपद स्थानान्तरण नहीं हुआ। दिखावे के लिये एकाध बार पटल परिवर्तन का आदेश जारी हुआ लेकिन इनका प्रभाव ऐसा था कि आदेश सिर्फ फाइलों तक सिमटकर रह गया। जानकारों का कहना है कि यदि इनके कार्यकाल में निर्गत किये गये लाइसेंसों सहित अन्य अभिलेखों की उच्च स्तरीय जांच की जाय तो बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हो सकता है।

सुपर सीएम की तर्ज पर चलता है 'रसूखदार' कर्मी
कृषि विभाग के गलियारों में एक ऐसे 'रसूखदार' कर्मचारी की जमकर चर्चा चल रही है जिसकी मर्जी के बिना जिले में कोई अधिकारी या कर्मचारी टिक नहीं सकता। वहीं जिसने बात मानने से इनकार किया तो उसका तबादला या विभागीय कार्यवाही तय रहती है। इस कर्मी पर अनियमित ढंग से पदोन्नति लेने और पत्नी के नाम पर एनजीओ बनाकर कृषि विभाग में करोड़ों का घोटाला करने का आरोप है। चर्चाओं की मानें तो यह कर्मी लखनऊ तक के अधिकारियों को अपनी जेब में रखने का दम्भ भरता है। जब भी इस पर या इसके चहेतों पर कोई संकट आता है तो यह तत्काल निदेशक कार्यालय लखनऊ या सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं की शरण में चला जाता है और प्रलोभन देकर पैरवी करवाता है। कृषि विभाग कार्यालय में इस कर्मी की आये दिन महफिल सजती है। दिन के उजाले में ही कार्यालय परिसर स्थित बने आवास में शराब के साथ मुर्गा—मीट का दौर चलता है। सूत्रों की मानें तो इसकी आव—भगत के लिये विभाग के दो कर्मचारी हमेशा 'एक पैर' पर खड़े रहते हैं। सरकारी कृषि यंत्रों और बीज गोदामों का आवंटन भी इसने अपने चहेतों के नाम कराकर लाखों रुपये डकार लिये हैं। इतना ही नहीं, जांच के आदेश होते ही यह उसे अपने रसूख से ठण्डे बस्ते में डलवा देता है।

डीएम का आदेश भी दबाये बैठे हैं विभागीय अधिकारी
इस पूरे सिंडिकेट और वर्चस्व की शिकायत बदलापुर क्षेत्र के सिद्धार्थ सिंह ने जिलाधिकारी से की थी। उन्होंने शिकायती पत्र में जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में तैनात विजय सिंह, डीडीएजी कार्यालय में तैनात प्रदीप मिश्र एवं अमित मिश्र पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाये थे। मामले की गम्भीरता को देखते हुये जिलाधिकारी ने बीते 14 मई को आरोपों की जांच कर आवश्यक दण्डात्मक कार्यवाही करने का कड़ा आदेश जारी किया था लेकिन विभागीय सूत्र बताते हैं कि रसूखदारों के दबाव में विभागीय अधिकारी इस जांच आदेश को दबाये बैठे हैं और फाइल आगे नहीं सरक रही है।

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