ज्ञानपुर, भदोही। हिन्दी पत्रकारिता दिवस के 200 वर्ष पूर्ण होने पर उत्तर प्रदेश एसोसिएशन आफ जर्नलिस्ट, जय हिंद राष्ट्रीय पत्रकार संगठन एवं भदोही ज्ञानपुर जिला पत्रकार एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार को जिला पंचायत के कांफ्रेंस हॉल में आयोजित विचार गोष्ठी में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, चुनौतियों और सामाजिक दायित्वों पर गंभीर मंथन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उदन्त मार्तण्ड से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर तक हिंदी पत्रकारिता की यात्रा को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताया। पत्रकार संगठनों की ओर से मुख्य अतिथि डा. सुनील कुमार को भदोही कर्मभूमि में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि “हिंदी पत्रकारिता केवल समाचारों का माध्यम नहीं रही, बल्कि इसने देश की सामाजिक चेतना, स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य किया है। आज एआई और डिजिटल मीडिया के दौर में पत्रकारिता की गति तो बढ़ी है लेकिन विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं को बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में पत्रकारों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे समाज को तथ्यात्मक, निष्पक्ष और सकारात्मक दिशा देने वाली खबरें दें। लोकतंत्र में पत्रकार को तकनीक के साथ सत्य और नैतिकता का प्रहरी बनकर रहना होगा।”
मुख्य वक्ता जयदेश के समाचार सम्पादक राम आसरे सिंह ने कहा कि “उदन्त मार्तण्ड से शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता की यात्रा आज मोबाइल स्क्रीन और एआई प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुकी है। पहले पत्रकारिता मिशन थी, अब प्रोफेशन और तकनीक का मिश्रण बन गई है। पत्रकारिता तभी मजबूत रहेगा जब पत्रकारिता निर्भीक और जनपक्षधर बनी रहे।” ज्ञानपुर विधायक विपुल दुबे ने कहा कि बदलते डिजिटल युग में पत्रकारिता को सत्य, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ना चाहिए।” जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की आवाज होते हैं और समाज को सही दिशा देने का कार्य करते हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम दास गुप्ता ने कहा कि पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। कार्यक्रम के संयोजक भदोही ज्ञानपुर जिला पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गोयल और संचालन उपज भदोही के वीरेंद्र चतुर्वेदी ने किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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