नौपेड़वा, जौनपुर। स्थानीय बाजार में मुख्य यजमान महेश मोदनवाल के आवास पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के 5वें सोमवार की रात्रि कथा ब्यास आचार्य डॉ. जयेश मिश्र ने कहा कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन की पूजा कर कुरीतियों का विनाश किया। कन्हैया ने इन्द्र का मान—मर्दन करते हुये गोर्वधन पूजन कर बताया कि हमें कुरीतियों को परंपरा के नाम पर ढोना नहीं चाहिये, बल्कि प्रगति वादी बनकर अच्छी परम्परा का सृजन करना चाहिए।
आचार्य ने माखन चोरी एवं श्रीकृष्ण लीला कथा सुनाते हुये कहा कि गोपियों ने यशोदा से कहा कि मैया तेरो लल्ला मिट्टी खा रहा है। मैया जब कृष्ण के पास पहुँच डांटते हुए पूछा की तूने मिट्टी खाई है तो कृष्ण ने कहा कि नही मैया मैंने मिट्टी नहीं खाई है। यशोदा की डांट पश्चात श्रीकृष्ण के मुंह खोलते ही विराट स्वरूप के दर्शन हुआ। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म पर विधर्मियों का हमला हो रहा है। उन्होंने कहा कि कहते हैं कि श्रीकृष्ण की रासलीला के समय उनकी आयु मात्र 7 वर्ष थी।गोपियों के सरोवर में नग्न होकर स्नान के दौरान उन्हें सीख देने के लिए वस्त्र को चुराना पड़ा। श्रीकृष्ण इसे देवताओं का अपमान मानते थे। उन्होंने राजा बलि की कथा सुनाते हुए कहा कि समर्पण से प्रसन्न भगवान वामन अति प्रसन्न हुए। शुक्राचार्य ने राजा बलि को दान करने से रोका जिस कारण उनकी एक आंख चली गयी। इस अवसर पर मुख्य यजमान महेश मोदनवाल, गुड़िया मोदनवाल, राम आसरे मोदनवाल, विजय मोदनवाल, राजेश मोदनवाल, रानू मोदनवाल, बच्चा मोदनवाल, चंदन मोदनवाल, बिनय जायसवाल, कुंदन सोनी सहित सैकड़ों भक्तों की भीड़ रही।
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