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Jaunpur : ​पूविवि को मिली 'एक जिला–एक व्यंजन' योजना में बड़ी जिम्मेदारी

टीम संचार सेतु

विरेन्द्र यादव/अजय विश्वकर्मा @ सरायख्वाजा, जौनपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा प्रदेश में "एक जिला–एक व्यंजन" योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में पूर्वांचल विश्वविद्यालय को इस योजना के अंतर्गत "ज्ञान भागीदार" के रूप में नामित किया गया है।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह को योजना के अंतर्गत तैयार की गई प्राथमिक रिपोर्ट समन्वयक प्रो. प्रदीप कुमार एवं नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने प्रस्तुत की। रिपोर्ट में शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार आजमगढ़, मऊ और जौनपुर जिलों के दो-दो पारंपरिक व्यंजनों/खाद्य उत्पादों की पहचान कर उनका विस्तृत दस्तावेजीकरण तैयार किया गया है जिसे शासन को प्रेषित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यह योजना प्रत्येक जिले की पारंपरिक खानपान परंपरा को चिन्हित कर उसे बाजार आधारित उत्पाद के रूप में विकसित करने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है। पूविवि को आजमगढ़, मऊ और जौनपुर जिलों के पारंपरिक व्यंजनों/खाद्य उत्पादों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण, गुणवत्ता मानक निर्धारण, पैकेजिंग सुधार, ब्रांडिंग एवं बाजार से जोड़ने की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पारंपरिक खान—पान और स्थानीय स्वाद की विविधता को देखते हुए यह योजना क्षेत्र के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह पहल प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजनों, मिठाइयों और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को नई पहचान देने में सहायक सिद्ध होगी जिससे छोटे उद्यमियों और कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
समन्वयक प्रो. प्रदीप कुमार ने बताया कि "एक जिला–एक व्यंजन" योजना के अंतर्गत चयनित उत्पादों को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग एवं पर्यटन आधारित पहचान के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत स्वच्छता, भंडारण अवधि, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग, पैकेजिंग, मूल्य श्रृंखला विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी आने वाले समय में विशेष कार्य किया जायेगा। नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि इस योजना के दूरगामी परिणाम बहुत सुखद होंगे। इस अवसर पर कुलसचिव केश लाल, प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रो. राजेश सिंह, डॉ. धीरेन्द्र कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं इसके दूरगामी लाभों पर अपने विचार साझा किये।

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