पुस्तक साहित्य समाज को जोड़ने व जागरूक करने का सशक्त है माध्यम: शक्तिमान
पुस्तक 'अनहद- जो कभी ना टूटा' का कुलपति ने किया विमोचन
केराकत, जौनपुर। पूर्वांचल की साहित्यिक धरती केराकत से निकली रचनात्मक चेतना ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा दी है। नगर के नालापार निवासी युवा साहित्यकार शक्तिमान मिश्रा की कृति "अनहद- जो कभी ना टूटा" का छत्तीसगढ़ प्रदेश के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल द्वारा भव्य विमोचन सम्पन्न हुआ। उक्त अवसर पर अस्तित्व प्रकाशन के निदेशक विक्रम सिंह ठाकुर ने लेखक को सम्मान स्वरूप प्रमाण पत्र प्रदान किया गया जिससे समारोह की गरिमा और बढ़ गई।
विदित हो कि "अनहद" मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों की ऊष्मा, नारी शक्ति और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखकर लिखी गई कृति है जो पाठकों को आत्मचिंतन और सकारात्मक दृष्टि प्रदान करती है। उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताते हुए लेखक की साहित्यिक साधना की सराहना किया।
इस बाबत लेखक शक्तिमान मिश्रा ने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और जागरूक करने का सशक्त माध्यम है तथा "अनहद- जो कभी ना टूटा" उसी विश्वास की अभिव्यक्ति है। यह विमोचन समारोह पूर्वांचल की साहित्यिक पहचान के राष्ट्रीय विस्तार का प्रतीक बनते हुए केराकत की कलम को नई गरिमा और व्यापक पहचान प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ।
पुस्तक 'अनहद- जो कभी ना टूटा' का कुलपति ने किया विमोचन
केराकत, जौनपुर। पूर्वांचल की साहित्यिक धरती केराकत से निकली रचनात्मक चेतना ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा दी है। नगर के नालापार निवासी युवा साहित्यकार शक्तिमान मिश्रा की कृति "अनहद- जो कभी ना टूटा" का छत्तीसगढ़ प्रदेश के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल द्वारा भव्य विमोचन सम्पन्न हुआ। उक्त अवसर पर अस्तित्व प्रकाशन के निदेशक विक्रम सिंह ठाकुर ने लेखक को सम्मान स्वरूप प्रमाण पत्र प्रदान किया गया जिससे समारोह की गरिमा और बढ़ गई।
विदित हो कि "अनहद" मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों की ऊष्मा, नारी शक्ति और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखकर लिखी गई कृति है जो पाठकों को आत्मचिंतन और सकारात्मक दृष्टि प्रदान करती है। उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताते हुए लेखक की साहित्यिक साधना की सराहना किया।
इस बाबत लेखक शक्तिमान मिश्रा ने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और जागरूक करने का सशक्त माध्यम है तथा "अनहद- जो कभी ना टूटा" उसी विश्वास की अभिव्यक्ति है। यह विमोचन समारोह पूर्वांचल की साहित्यिक पहचान के राष्ट्रीय विस्तार का प्रतीक बनते हुए केराकत की कलम को नई गरिमा और व्यापक पहचान प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ।
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