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Jaunpur : ​भगवान को धन—दौलत से नहीं, बल्कि प्रेम एवं भक्ति से पाया जा सकता है: नारद महाराज

टीम संचार सेतु

मड़ियाहूं, जौनपुर। स्थानीय नगर के आरोग्य हॉस्पिटल में आयोजित गीता पाठ कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ी। कार्यक्रम में स्वामी अड़गड़ानन्द महाराज के शिष्य नारद महाराज ने प्रवचन देते हुये कहा कि भजन की शुरुआत गृहस्थ आश्रम से ही होती है। एक परमात्मा की शरण में रहने वाली आत्मा ही सत्य और सनातन है। मनुष्य यदि सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण और भजन करता है तो वह निश्चित रूप से परमात्मा को प्राप्त कर सकता है।
नारद महाराज ने कहा कि ईश्वर को पाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम भजन है। भगवान को धन दौलत से नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति से पाया जा सकता है। गृहस्थ जीवन को त्यागने की नहीं, बल्कि उसे साधना का आधार बनाने की आवश्यकता है। परिवार और समाज के बीच रहते हुए भी व्यक्ति भक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने घरों में 'यथार्थ गीता' का नियमित पाठ करने और उसके संदेशों को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम आयोजक डा. एके यादव ने सभी संतों व आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आर.डी. यादव, आचार्य विनय दुबे, राधाकृष्ण शर्मा, रविंद्र यादव, प्यारे लाल शर्मा, बैजनाथ प्रजापति सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

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