Jaunpur : ​हत्यारा मांझा ने समीर हाशमी को उतार दिया मौत के घाट

जौनपुर। जनपद के तमाम स्वयंसेवियों की बुलन्द आवाज एवं जिला प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद भी प्रतिबंधित चाइनीज मांझा की बिक्री पर रोक नहीं लग रही है। यही कारण है कि गत दिवस एक शिक्षक की मौत होने के बाद अब एक चिकित्सक की भी जान चली गयी। इतनी जागरूकता एवं हो—हल्ला होने के बावजूद भी चाइनीज मांझा चोरी छिपे बिक रहा है जिसका जीता—जगता उदाहरण बुधवार को उस समय देखने को मिला जब इसी हत्यारे मांझे की चपेट में आने से एक डाक्टर की मौत हो गयी।
बता दें कि बुधवार को दोपहर नगर के लाइन बाजार के पचहटियां के पास केराकत के शेखजादा मोहल्ला निवासी डा. समीर हाशमी 25 वर्ष किसी मरीज को देखने के लिये जिला अस्पताल से वापस घर जा रहे थे कि रास्ते में पंचहटिया पुराने पोस्टमार्टम के सामने कटी पतंग के मांझे की चपेट में आने से उनकी गर्दन बुरी तरह से कट गयी। देखते ही देखते दुर्घटना स्थल खून से लथपथ हो गया जिसको देख स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचित किया जिस पर घायल चिकित्सक को एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल ले जाया गया जहां गर्दन कटने एवं अधिक रक्तस्राव से डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही मृतक के पिता मुकीम और भाई जावेद जिला अस्पताल पहुंच गये।
बता दें कि 4 बेटों में डा. समीर सबसे छोटे जो परिवार के सहारा थे। वहीं जानकारी होने पर क्षेत्राधिकारी नगर गोल्डी गुप्ता आईपीएस सहित तमाम प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गये। समाचार लिखे जाने तक शव को कब्जे में लेकर अन्त्य परीक्षण हेतु भेज दिया गया। साथ ही अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिसिया कार्यवाही भी शुरू हो गयी।

डी फार्मा करके क्लीनिक चलाता था मृतक
मृतक 4 भाई व 4 बहनों में सबसे छोटा था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डी फार्मा का ट्रेनिंग पूरी करके सिहौली चौराहे के समीप खुद की क्लिनिक खोल परिवार का भरण पोषण करता था। पिता कपिल हाशमी बैंड पार्टी चलाने का काम करते हैं। समीर की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो—रो कर बुरा हाल है।

चाइनीज मांझे से जनपद में हुई दूसरी मौत
इसके पहले चाइनीज मांझे की चपेट में आने से शिक्षक की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसा तब हुआ जब शिक्षक अपनी बेटी को स्कूल छोड़ घर वापस लौट रहा था जिसके बाद शिक्षकों में चाइनीज मांझे को लेकर आक्रोश फूटा और तमाम लोगों ने जिला एवं पुलिस प्रशासन को पत्रक सौंपकर सख्त कार्यवाही की मांग को उठाई थी। जिला प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद भी चाइनीज मांझे पर रोक नहीं लग पा रही है। आख़िर कब तक बेवजह मासूम लोग अपनी जानें गवांते रहेंगे?

गैंगेस्टर एक्ट का मुकदमा हुआ दर्ज
घटना की सूचना पर पहुंचे सहायक पुलिस अधीक्षक/नगर क्षेत्राधिकारी गोल्डी गुप्ता आईपीएस ने बताया कि मृतक के परिजनों की तहरीर के आधार पर गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया जा रहा है। साथ ही मांझा बेचने वालों पर कार्यवाही भी की जा रही है। मकर संक्रांति को लेकर उन्होंने कहा कि त्योहार पर पतंग उड़ाने का रिवाज है। वह आप पूरा करें, मगर कृपया कर के काटन के धागे का उपयोग करें।

पुलिस पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही
लोगों की मानें तो प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर रोक लगाने में पुलिस पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। हाल ही में ज‍िले में एक शिक्षक की भी इसी प्रकार की घटना में उस समय मौत हो चुकी है जब वह अपनी बेटी को स्कूल छोड़कर घर लौट रहे थे। यह घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि प्रतिबंधित मांझे के उपयोग को लेकर जागरूकता और सख्त कार्यवाही की आवश्यकता है।

परिवार सहित क्षेत्र में दौड़ी शोक की लहर
समीर की मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रशासन को इस पर गम्भीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रतिबंधित मांझे का उपयोग न केवल जानलेवा है, बल्कि यह समाज के लिये भी एक गम्भीर खतरा बन चुका है। समीर के परिवार में इस घटना से गहरा दुख छा गया है।

परिवार के जीविका का मुख्य माध्यम था मृतक
मृतक के पिता मुकीम ने कहा कि 4 पुत्रों में डा. समीर ही परिवार के जीविका का साधन था। ऊपर वाले ने मुझसे मेरा बेटा छीन लिया। यह घटना न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिये दुखदायी है। चाइनीज मांझा बड़ी चेतावनी भी है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग किया कि इस प्रकार के मांझे की बिक्री पर सख्त कार्यवाही की जाय, ताकि भविष्य में किसी और की जान न जाय। पतंगों की उड़ान ने हादसे भी दे द‍िये हैं।

सभी को मिलकर समस्या का समाधान निकालने की आवश्यकता
लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन इस मुद्दे पर गम्भीरता से ध्यान नहीं देगा तो आने वाले समय में और भी जानें जा सकती हैं। स्कूलों और कॉलेजों में इस विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाने चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी इस खतरे को समझ सके। इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि प्रतिबंधित मांझे का उपयोग न केवल अवैध है, बल्कि यह जनजीवन के लिये भी अत्यन्त खतरनाक है। समाज के सभी वर्गों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने की आवश्यकता है। समीर की मौत ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं या नहीं। प्रशासन को चाहिए कि वह इस दिशा में ठोस कदम उठाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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