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छठ महापर्व: किऊल नदी,जमुई में आस्था का सैलाब। Sanchar Setu

टीम संचार सेतु
 

जमुई,(बिहार)।  लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) के अवसर पर जमुई की किऊल नदी के घाटों पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। व्रती परिवार और श्रद्धालु चार दिवसीय इस कठिन अनुष्ठान में लीन हैं, जिसमें नहाय-खाय और खरना के बाद आज (सोमवार) शाम अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा।
परिवार और व्रतियों की आस्था किऊल नदी के विभिन्न घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ छठ की पूजा सामग्री लेकर पहुंच रहे हैं। व्रती सुषमा सिंह जैसी महिलाएं 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर, अपने परिवार के सदस्यों जय शंकर सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह, रमा शंकर, रविशंकर, अनीश सिंह, सुभद्रा देवी ,नमिता सिंह व बच्चों में  खुशी, प्रिया, नव्या और कुणाल के साथ मिलकर छठ माता और सूर्य देव को अर्घ्य दिए। परिवार के पुरुष सदस्य घाटों की साज-सज्जा और पूजा की तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं।
किऊल नदी घाटों पर तैयारी
जमुई में किऊल नदी को 'छोटी गंगा' के रूप में भी जाना जाता है और यहां के घाटों पर विशेष व्यवस्था की गई है:
घाटों की सफाई: नगर परिषद और स्थानीय छठ पूजा समितियों ने मिलकर नदी घाटों की व्यापक सफाई की है, ताकि व्रतियों को कोई असुविधा न हो।
सुरक्षा व्यवस्था: प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। नदी तट पर पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
रोशनी और सजावट: घाटों को आकर्षक रोशनी और रंगीन पंडालों से सजाया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है।
मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य चार दिवसीय महापर्व का विधिवत समापन मंगलवार सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। इसके बाद व्रती छठ माता से परिवार की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना कर पारण करेंगी। यह पर्व न केवल जमुई बल्कि पूरे बिहार की लोक संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, जो प्रकृति और सूर्य की उपासना का संदेश देता है।






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