जौनपुर। देश की प्राचीन सनातन धर्म की सांस्कृतिक राजधानी काशी (बनारस) में श्रवण मास पर अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद द्वारा 5 अगस्त को राष्ट्रीय कार्यकर्ता प्रतिनिधि सम्मेलन श्री काव्य कुंज धर्मशाला नाटी इमली में सुनिश्चित की गयी है। सम्मेलन में पूरे देश के वैश्य समाज के प्रतिनिधिगण भाग लेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रवीन्द्र जायसवाल स्टाम्प न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग उत्तर प्रदेश होंगे। वहीं 6 अगस्त को द्वितीय वर्षगांठ पर भगवान विश्वनाथ के पावन धाम काशी में सामूहिक रूप से जलाभिषेक का कार्यक्रम रवीन्द्र जायसवाल मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के नेतृत्व में किया जायेगा। उक्त बातें अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सुमन्त गुप्ता ने शुक्रवार को नगर के सुतहट्टी चौराहे पर स्थित एक प्लाजा में पत्रकारों से हुई वार्ता के दौरान कही।
उन्होंने आगे बताया कि उक्त सम्मेलन में राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक क्षेत्र से सम्बन्धित प्रस्ताव भी पारित किये जायेंगे। देश में वैश्य समाज की आबादी २० प्रतिशत है लेकिन राजनैतिक हिस्सेदारी नगण्य है। वैश्य समाज को राजनैतिक हिस्सेदारी से सभी राजनैतिक पार्टियों द्वारा निरन्तर उपेक्षित किया जा रहा है। ज्ञातव्य हो कि वैश्य समाज भारतीय जनता पार्टी का स्थायी व परम्परागत वोट है। वोट बैंक के हिसाब से लोकसभा एवं विधानसभा व विधान परिषद में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिल पा रही है। यही अवगत कराना अति आवश्यक है कि वैश्य व्यापारी समाज राष्ट्र के विकास में अभूतपूर्व योगदान है तथा राजस्व देने में अग्रणी भूमिका व रोजगार के साधन मुहैया कराने में भी सबसे आगे है। साथ ही सामाजिक धार्मिक क्षेत्रों में इसके सशक्त हस्ताक्षर है। धार्मिक दृष्टि से वह अपने को आर.एस.एस. के निकट मानता है। कस्बों, नगरों, महानगरों में माहौल बनाने में भी सबसे आगे हैं।डा. गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन में फिजूलखर्ची रोकने के लिये प्रमुख संकल्प लिये गये हैं। सम्मेलन में विवाह योग्य युवक युवतियों के परिजनों से आग्रह किया जाएगा कि वह अपने वैवाहिक सम्बन्ध वैश्य समाज के एक उपवर्ग से दूसरे उपवर्ग में करने को प्रोत्साहित करें। इसी से वैश्य एकता का भाव मजबूत होगा। वैवाहिक कार्यक्रमों में व्यंजन की संख्या सीमित रखी जानी चाहिए। धन और अन्न का अपव्यय रूकेगा। विवाह के पहले प्री वेडिंग मैरिज फोटोसूट का प्रयोग किसी भी दृष्टि से उचित नहीं इसे रोका जाना चाहिए। लिव इन रिलेशनशिप पर सरकार द्वारा पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाय। इससे परिवार के टूटने की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। लव मैरिज में दानों पक्षों के अभिभावकों की सहमति के साथ कोर्ट में हस्ताक्षर अनिवार्य किया जाना चाहिए। वैवाहिक कार्यक्रमों में विशेषकर सड़क पर बैंड की ध्वनि पर महिलाएं नृत्य करती हैं। उसको रोका जाना चाहिए तथा युवा वर्ग शराब का सेवन करके नृत्य करते हैं व घन को लुटाते हैं। उसको कड़ाई से रोकने की आवश्यकता है। वैवाहिक कार्यक्रम रात्रि के स्थान पर दिन में किए जाने चाहिए तथा सप्तपदी (भांवर) जो वैवाहिक कार्यक्रम का मूल भाव है तथा यार्मिक दृष्टि से इसका सर्वाधिक महत्व है, इसको प्रोत्साहित करने की आवश्कता है। तलाक के मुकदमे विभिन्न न्यायालयों में बढ़ते जले जा रहे हैं। इसमें समाज के वरिष्ठ जनों को आगे आना चाहिए जिससे परिवार टूटने से बचाया जा सके।
उन्होंने राजनैतिक प्रस्ताव के बारे में बताया कि समाजसेवा में अग्रणी भूमिका का निर्वाह करने वाले तथा सरकार के खजाने में राजस्व देने वाले व्यापारी बंधुओं को सरकारी निगमों सहित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों मनोनीत किये जायं तथा विधान परिषद/राज्य सभा में कर दाताओं को 10 प्रतिशत सीट आरक्षित की जाय। आर्थिक अपराध के मामले में हिरासत में लिए गए करदाताओं को हथकड़ी नहीं लगानी चाहिए तथा कारागार में उन्हें हत्या, दुष्कर्म जैसे घृणित मामलों के अपराधियों के साथ नहीं रखा जाना चाहिए। उसके साथ यह भी माँग है कि धारा ४3(3) से आर्थिक अपराधी शब्द को संशोधित किया जाना चाहिये।
उन्होंने आर्थिक प्रस्ताव के बारे में बताया कि जीएसटी प्रणाली में पेनाल्टी के साथ सजा का भी प्रावधान किया गया है जो किसी भी दृष्टि से न्याय संगत नहीं है। मांग है कि सजा के प्रावधान को समाप्त किया जाये। छोटे, मध्यम व मझोले व्यापारियों को सर्वे, छापे से मुक्त रखा जाये व जीएसटी को ईडी से न जोड़ा जाय। जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों को 10 लाख रूपये का बीमा सरकार द्वारा सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना जो वाणिज्य कर विभाग उत्तर प्रदेश में लागू है। दुर्घटना में मृत्यु अथवा हत्या पूर्ण विकलांगता व आंशिक विकलांगता को अंकित किया गया है। अतः आपसे अनुरोध है कि इस बीमा योजना में गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हार्ट अटैक, लिवर आदि को भी जोड़ा जाना चाहिए। गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्चा सरकार द्वारा वहन किया जाना चाहिए। जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों के मृतक के आश्रितों को 20 लाख रूपये की आर्थिक सहायता तथा जो व्यापारिक प्रतिष्ठान जीएसटी में पंजीकृत नहीं है लेकिन उनके पास विद्युत का कॉमर्शियल कनेक्शन तथा श्रम विभाग में पंजीकृत है उनको 10 लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी जाय। 'व्यापारी वृद्धावस्था पेंशन' व्यापारियों को ६५ वर्ष की आयु में दी जाय। फूड एण्ड सेफ्टी स्टैण्डर्ड एक्ट रूल एण्ड रेगुलेशन के अंतर्गत उत्पाद बेचने वाले रिटेलर व निर्माता सभी को पार्टी बनाकर खाय विभाग के अधिकारी केस दर्ज करते हैं। मांग है कि निर्माता को ही जिम्मेदार मानकर उस पर ही केस चलाया जाना चाहिए। विद्युत विभाग की लापरवाही से व्यापारिक प्रतिष्ठानों/गोदाम में ट्रांस्फॉर्मर बिजली के जर्जर तारों से आगजनी की भीषण घटनाएं अनेकों स्थानों पर होती हैं। मांग है कि क्षतिपूर्ति आर्थिक मुआवजा पीड़ित दुकानदारों को देने का प्रावधान किया जाय। मांग है कि जनपद की सीमा के अंतर्गत आने वाले पौराणिक व एतिहासिक मन्दिरों/आश्रमों को निकाय के टैक्स व विद्युत शुल्क से मुक्त किया जाना चाहिये। इस अवसर पर परिषद के मण्डल उपाध्यक्ष श्याम चन्द्र गुप्ता, जिलाध्यक्ष अरविन्द बैंकर सहित तमाम पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
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