मड़ियाहूं, जौनपुर। स्वदेशी जागरण मंच के काशी प्रांत कार्यसमिति सदस्य डॉ. विवेक मिश्र ने काशी में प्रधानमंत्री के स्वदेशी आह्वान पर बात करते हुए बताया कि स्वदेशी जागरण मंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वदेशी के आह्वान का स्वागत करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों की खरीद और बिक्री भी राष्ट्र की सच्ची सेवा है। 1991 में अपनी स्थापना के बाद से ही स्वदेशी जागरण मंच स्वदेशी अपनाने के लिए जनता में जागरूकता पैदा कर रहा है। मंच का दृढ़ विश्वास है कि हमारा राष्ट्र स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के आधार पर ही समृद्ध हो सकता है। वैश्विक अनिश्चितताओं की वर्तमान परिस्थितियों में जहाँ वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं, भुगतान प्रणालियों और वैश्विक मुद्राओं को हथियार बनाया जा रहा है, अमरीका सहित अन्य देश अधिक से अधिक संरक्षणवादी बन रहे हैं और टैरिफ दीवारों और अन्यायपूर्ण गैर-टैरिफ बाधाओं का उपयोग करके वैश्विक निर्यात को अवरुद्ध किया जा रहा है, कुछ देशों, विशेष रूप से चीन द्वारा अतिरिक्त क्षमताओं के आधार पर माल डंप किया जा रहा है और हमारे विनिर्माण को खत्म करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। ऐसे में स्वदेशी राष्ट्रीय हितों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन हो सकता है।
डा. मिश्र ने बताया कि प्रधानमंत्री ने भारतीयों द्वारा विदेशी विवाहों से परहेज़ करने का उदाहरण दिया है। स्वदेशी जागरण मंच का मानना है कि मूल्यवान विदेशी मुद्रा बचाने के और भी कई उपाय हो सकते हैं। सामान्य रूप से विदेशी वस्तुओं का न्यूनतम उपयोग, और चीन, तुर्की सहित अन्य विरोधी देशों की वस्तुओं और सेवाओं का बहिष्कार करना, कुछ अपवादों को छोड़, विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन का मोह त्यागना, स्थानीय उत्पादों का उपयोग और कारीगरों को बढ़ावा देना, न केवल मूल्यवान विदेशी मुद्रा बचाने में सहायक हो सकता है, बल्कि विकास के विकेंद्रीकृत मॉडल के आधार पर स्थानीय स्तर पर रोज़गार, आजीविका और लोगों के कल्याण को भी बढ़ावा दे सकता है। मंच द्वारा बड़ी संख्या में व्यापारियों और विनिर्माण कंपनियों के संघों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर 12 जून को 'स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान' की शुरुआत के साथ, स्वदेशी आंदोलन को फिर से गति दी गई है जिसका उद्देश्य देश के कोने-कोने में भारत को पुनः महान बनाने (जिसे प्रधानमंत्री 'मीगा' यानि मेक इंडिया ग्रेट अगेन कहते हैं) के लिए जागरूकता पैदा करना है। भारत का स्वतंत्रता संग्राम में स्वदेशी आंदोलन केवल ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करने का आंदोलन नहीं था, बल्कि आर्थिक सम्मान, सांस्कृतिक पहचान और सभ्यतागत संप्रभुता का दावा भी था। स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती दौर में शुरू हुआ स्वदेशी आंदोलन, वास्तव में विदेशी वस्तुओं को अस्वीकार करने, घरेलू उत्पादन को बहाल करने और भारत के आत्मनिर्भर आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्निर्माण का एक आह्वान था। मंच देश के प्रत्येक नागरिक से 'स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान' का हिस्सा बनने का आह्वान करता है जिसका एकमात्र उद्देश्य हमारे भारत को फिर से महान बनाना है।Jaunpur News : प्रधानमंत्री का स्वदेशी आह्वान बनेगा जन अभियान: डा. विवेक
byटीम संचार सेतु
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