खुटहन, जौनपुर। विश्व पटल पर भारत एक आदर्श देश के रूप में जाना जाता है जिसका मूल कारण यहां की शिक्षा है जो व्यवसाय परक नहीं, बल्कि संस्कार के साथ ज्ञान प्राप्ति की है जिनका आधार स्तंभ शिक्षक होते हैं इसीलिए शिक्षक कभी कार्यमुक्त नहीं माना जाता, बल्कि सेवा समाप्ति के बाद उसका उत्तर दायित्व समाज के प्रति और भी कई गुना बढ़ जाता है। उक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी विपुल कुमार उपाध्याय ने कंपोजिट विद्यालय बरबसपुर में आयोजित अवकाश प्राप्त शिक्षक का सम्मान करते हुए कही। उन्होंने सेवा मुक्त हुई महिला शिक्षक श्रीमती रेखा सिंह को अंगवस्त्रम् और धार्मिक पुस्तक भेंट किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक वह माली है जो जो वृक्ष को मुर्झाने से पहले समझ जाता है कि इसे हरा भरा करने के लिए क्या आवश्यक है? उसके जमाए छात्र रूपी पौध सूखने से पहले ही वह ऐसा उपचार कर देता है कि वह एक नई उर्जा के साथ पल्लवित हो उठता है। उन्होंने मौजूद शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने वास्तविक वजूद को समझें। खुद को सिर्फ ड्यूटी वाला सरकारी कर्मचारी न मान अपने आदर्शों और दायित्वों को समझ कर उन्हें आत्मसात करें। आदर्श शिक्षक चतुर्दिक सम्माननीय होता है। इस मौके पर एआरपी जयप्रकाश सिंह, सुरेंद्र बहादुर सिंह, राकेश कुमार सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता ग्राम प्रधान खुशियाल व संचालन अभिषेक उपाध्याय ने किया। सुभाष चंद्र यादव द्वारा आगंतुकों का स्वागत किया गया।Jaunpur News : शिक्षक कभी कार्यमुक्त नहीं होता
byटीम संचार सेतु
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