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Jaunpur News : प्राचार्य के पिता की मिट्टी में उमड़ा जनसैलाब

Naya Savera Network

समाजसेवा और इंसानियत की मिसाल शमीम अहमद को नम आंखों से अंतिम विदाई

जौनपुर। मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज, जौनपुर के प्राचार्य डॉ. अब्दुल कादिर खान के पिता शमीम अहमद इब्ने नूरुद्दीन खान के इंतकाल से क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त हो गई। 85 वर्ष की आयु में दुनिया से रुख्सत हुए मरहूम शमीम अहमद को शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2026 को जोहर की नमाज़ के बाद ग्राम उत्तर पट्टी, पोस्ट बघैला, मल्हनी बाजार, विकासखंड करंजाकला, जनपद जौनपुर स्थित पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। इस अवसर पर उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, मित्रों, शुभचिंतकों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के गणमान्य लोगों के साथ-साथ विभिन्न धर्मों, जातियों एवं समुदायों के लोगों ने उपस्थित होकर मरहूम के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। माहौल बेहद गमगीन और भावुक रहा तथा लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। मरहूम शमीम अहमद एक नेकदिल, मिलनसार, मददगार और इंसानियत को महत्व देने वाले व्यक्ति थे। वह जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहते थे और अपनी सामर्थ्य के अनुसार लोगों की मदद करने में पीछे नहीं हटते थे। दूसरों के दुःख-दर्द को समझना, जरूरत के समय उनके काम आना और सभी के साथ प्रेम एवं अपनापन बनाए रखना उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं थीं। उनके इंतकाल पर विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश की। लोगों की मौजूदगी और भावुक माहौल ने यह साबित किया कि इंसान अपने अच्छे व्यवहार, नेक कार्यों और दूसरों की मदद के जरिए समाज के दिलों में विशेष स्थान बनाता है। इस दुःख की घड़ी में उपस्थित लोगों ने प्राचार्य डॉ. अब्दुल कादिर खान एवं उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें ढांढस बंधाया। मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज परिवार ने भी मरहूम के इंतकाल पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की और दिवंगत के लिए दुआ-ए-मगफिरत की। अल्लाह तआला से दुआ की गई कि वह मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से मुनव्वर करे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए तथा परिवार के सभी सदस्यों को इस अपार दुःख को सहन करने के लिए सब्र-ए-जमील प्रदान करे।

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