जौनपुर। जिले में डेंगू और मच्छरजनित बीमारियों के मामले बढ़ने लगे हैं। अधिकांश निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों के पहुंचने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मरीजों के परिजन प्लेटलेट्स के लिए परेशान हो रहे हैं। वहीं शासन के निर्देश के बावजूद निजी अस्पताल और पैथोलॉजी संचालक डेंगू व मलेरिया के मरीजों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं दे रहे हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों की सही जानकारी विभाग को नहीं मिल पा रही है और रोकथाम के लिए समय पर कार्रवाई करने में दिक्कत आ रही है।
पिछले साल डेंगू की स्थिति को देखते हुए लोग इस बार भी चिंतित हैं। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के मरीजों का उपचार चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने निजी चिकित्सकों और पैथोलॉजी संचालकों को डेंगू व मलेरिया के मरीजों की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, लेकिन एक-दो को छोड़कर अधिकांश अस्पताल और पैथोलॉजी सेंटर इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार एलाइजा जांच में डेंगू के पांच मरीजों की पुष्टि हुई है, जबकि किट से 23 मरीजों की पहचान हुई है। इसके अलावा मलेरिया के 18 और चिकनगुनिया का एक मरीज भी मिला है। विभाग का कहना है कि निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी से पूरी जानकारी नहीं मिलने के कारण वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि डेंगू की कई रिपोर्ट गलत होने की शिकायतें भी मिल रही हैं। वहीं सही रिपोर्ट होने के बावजूद कई लोग इसकी जानकारी विभाग को देने से बच रहे हैं। निजी चिकित्सकों की ओर से भी मरीजों की जांच तय लैब से कराकर रिपोर्ट फोन पर बताए जाने की शिकायत है।
सभी पैथोलॉजी संचालकों को पत्र भेजकर डेंगू पॉजिटिव मरीज मिलने पर तत्काल विभाग को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ के निर्देश पर दोबारा पत्र भेजा गया है। आदेश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मच्छरों से बचाव जरूरी
डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर आमतौर पर दिन के समय काटते हैं। घरों और आसपास कूलर, खाली डिब्बे, कनस्तर, गमले और गड्ढों में पानी जमा न होने दें। जहां पानी रुकता हो, वहां समय-समय पर मच्छररोधी दवा का छिड़काव करें। शरीर को ढककर रखें और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।