कहा— बचपन गरीबी में बीता, इसलिये समझता हूं गरीबों का दर्द
बरसठी, जौनपुर। मछलीशहर विधानसभा के एक छोटे से गांव भिखारीपुर (खास), अदनपुर से निकलकर राजनीति को समाजसेवा का प्रभावी माध्यम बनाने वाले युवा समाजसेवी और राजनीतिक कार्यकर्ता धर्मेंद्र सरोज (डीके) संघर्ष, मेहनत और जनता के प्रति समर्पण की मिसाल बनते जा रहे हैं। इन दिनों वह मछलीशहर क्षेत्र में तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। मोती नगर सब्जी मण्डी निवासी धर्मेंद्र जी का नाम अब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और गरीब परिवारों की उम्मीद के रूप में लिया जाने लगा है। गरीबी और अभावों के बीच जीवन की चुनौतियों का सामना करने वाले धर्मेंद्र जी आज उन्हीं लोगों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं जिनकी आवाज अक्सर व्यवस्था के शोर में दब जाती है। क्षेत्र में लगातार जनसम्पर्क, सामाजिक कार्यों में भागीदारी और जरूरतमन्दों के साथ खड़े रहने की वजह से उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
ग्रामीणांचलों से लेकर कस्बाई इलाकों तक धर्मेंद्र जी के समर्थन में लोगों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है। खासकर युवा वर्ग उन्हें अपने भविष्य की उम्मीद के रूप में देख रहा है जबकि महिलाओं और बुजुर्गों के बीच भी उनकी स्वीकार्यता लगातार मजबूत हो रही है।
हर दिलो—दिमाग में बस गये हैं धर्मेन्द्र जी
मछलीशहर में इन दिनों जिस नाम की तेजी से चर्चा हो रही है, वह नाम है धर्मेंद्र सरोज। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों से निकलकर समाज के हर वर्ग की आवाज बनने की कोशिश कर रहे धर्मेन्द्र जी का जनसम्पर्क अभियान लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि धर्मेन्द्र जी बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग के लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं। यही कारण है कि उनका जनाधार धीरे-धीरे मजबूत होता दिखाई दे रहा है।
मजबूत चेहरा बन सकते हैं
क्षेत्र में मिशन—2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसी बीच धर्मेन्द्र सरोज का नाम युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय होता दिखायी दे रहा है। रोजगार, शिक्षा, सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र के युवाओं के बीच खास पहचान दिलाई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यही जनसंपर्क और सामाजिक सक्रियता जारी रही तो आने वाले समय में धर्मेंद्र जी क्षेत्रीय राजनीति में एक मजबूत चेहरा बन सकते हैं।
बढ़ती ताकत से बदल रहा राजनीतिक समीकरण
मछलीशहर की गलियों से लेकर गांवों की चौपाल तक इन दिनों धर्मेंद्र जी की चर्चा सुनाई दे रही है। संघर्षों से भरे जीवन से निकलकर जनता के बीच अपनी पहचान बनाने वाले धर्मेंद्र जी युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के सम्मान की बात कर रहे हैं। समर्थकों का दावा है कि धर्मेंद्र सरोज का बढ़ता जनसम्पर्क और लोगों के सुख-दुख में सहभागिता उन्हें क्षेत्र की राजनीति में तेजी से उभरता चेहरा बना रही है। मिशन 2027 को लेकर उनकी सक्रियता ने राजनीतिक हलकों में भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
गरीबी को धर्मेन्द्र ने कमजोरी नहीं, ताकत बनाया
धर्मेन्द्र जी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना या राजनीति करना नहीं, बल्कि समाज के गरीब, दलित, असहाय और दबे-कुचले लोगों की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है। उन्होंने अपने संघर्षमय जीवन, समाजसेवा के प्रति समर्पण और मिशन—2027 को लेकर खुलकर अपनी बातें रखीं। मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राजनीति उनके लिये सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज सेवा का एक मजबूत माध्यम है। बचपन से ही उन्हें समाजसेवा के कार्यों में विशेष रुचि रही है और वह लगातार जरूरतमन्दों की मदद करते रहे हैं। समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें राजनीति से जुड़कर ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। यही सोच उन्हें सक्रिय राजनीति में लेकर आयी। युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं का उन्हें लगातार आशीर्वाद और समर्थन मिलता रहा है जिससे उनका मनोबल और मजबूत हुआ है।
आदेश मिला तो पालन अवश्य करूंगा
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पूछे गये सवाल पर धर्मेंद्र सरोज ने कहा कि वह पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता हैं। पार्टी का जो भी आदेश होगा, उसका पालन करेंगे। यदि पार्टी उन पर विश्वास जताकर उन्हें टिकट देती है तो वह जनता की इच्छा, आकांक्षाओं और विश्वास पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। उनका लक्ष्य राजनीति के माध्यम से क्षेत्र के विकास, युवाओं के भविष्य, महिलाओं के सम्मान और गरीबों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करना है। अपने संघर्षों को याद करते हुए वह भावुक हो उठे। उनके गांव में सबसे गरीब परिवार उनका ही था जिन्होंने बेहद अभावों के बीच अपना जीवन बिताया है। कठिन परिस्थितियों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी, बल्कि गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनाया।
