जौनपुर। समाजसेविका अंजू पाठक सदस्य जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सोमवार को एक ऐसा कार्य कर दिया जो न अपने कर्तव्यों का निर्वहन था, बल्कि समाज को एक संदेश भी रहा।
इसको लेकर परिवार, रिश्तेदार ही नहीं, बल्कि पूरे जनपद सहित सुदूर जगहों पर अंजू पाठक के इस नेक कार्य की चर्चा हो रही है। जनपद बुलंदशहर (खुर्जा) के मूल निवासी संजयकान्त तिवारी काशी विद्यापीठ वाराणसी से शिक्षित होकर अपनी बहन अंजू पाठक के घर उस समय से रह रहे थे जब वर्ष 2013 में उनके पति का निधन हो गया था। संजय जी का 56 वर्ष अवस्था में निधन हो गया। सुश्री पाठक के पति के असामयिक निधन के पश्चात परिवार की समस्त जिम्मेदारियों का निर्वहन अत्यन्त निष्ठा, समर्पण एवं संवेदनशीलता के साथ किया। संजय जी अंजू पाठक के पुत्र के साथ मिलकर पारिवारिक व्यवसाय को न केवल संभाला, बल्कि उसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया। उनका जीवन सादगी, सहयोग, कर्तव्यनिष्ठा एवं पारिवारिक मूल्यों के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक रहा। वह अविवाहित थे जिनके निकट कोई अन्य पुरुष सदस्य (रक्त संबंध) न होने से अंजू पाठक ने ही समस्त धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार सम्पन्न कराया जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

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