बदलापुर, जौनपुर। जनपद के बहुचर्चित स्वाधीन सिंह हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को बदलापुर की सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। 'जनता की अदालत' के माध्यम से अपनी आवाज बुलन्द करने निकले पीड़ित परिवारों को जब प्रशासन ने रोकने की कोशिश की तो मामला और भी गर्मा गया। विद्यावती रिसार्ट से लेकर तहसील मुख्यालय तक घंटों चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय हिंदू मित्र परिषद के अध्यक्ष और सोशल एक्टिविस्ट अरविंद पांडेय के नेतृत्व में बुधवार को विद्यावती रिसॉर्ट में 'जनता की अदालत' का भव्य आयोजन होना था। इसकी तैयारी पिछले कई दिनों से चल रही थी। हालांकि पुलिस प्रशासन ने कार्यक्रम शुरू होने से ऐन पहले रिसॉर्ट के लॉन में ताला जड़ दिया और आयोजन पर रोक लगा दी। पुलिस का तर्क था कि इस आयोजन के लिए प्रशासन से अग्रिम वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी। भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण रिसॉर्ट परिसर किसी छावनी जैसा नजर आने लगा।
कार्यक्रम रुकने से आक्रोशित पीड़ित पक्ष ने बदलापुर पुलिस के आला अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। परिजनों ने सीधे तौर पर बदलापुर कोतवाल शेषनाथ शुक्ला, एसओजी प्रभारी त्रिवेणी सिंह और सीओ बदलापुर पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगाये।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि "पुलिस के इन अधिकारियों ने विपक्षी पक्ष से मोटी रकम लेकर मामले की जांच को प्रभावित किया है और निर्दोष बच्चों को गलत तरीके से केस में फंसाया है। प्रशासन न्याय देने के बजाय हमारी आवाज दबाने में जुटा है।"
तहसील परिसर में घंटों चली नारेबाजी और प्रदर्शन के बाद एसडीएम बदलापुर ने पीड़ित पक्ष से मुलाकात की और उनका पक्ष सुना। स्वाधीन सिंह हत्याकाण्ड ने पहले ही बदलापुर की राजनीति को गरमा रखा था लेकिन आज पुलिस अधिकारियों पर लगे 'वसूली' के आरोपों ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।
तीन माताओं की चीख से गूंजी तहसील
रिसॉर्ट पर पाबंदी के बाद सैकड़ों की संख्या में लोग पैदल मार्च करते हुए बदलापुर तहसील पहुंचे। इस प्रदर्शन का नेतृत्व हत्याकांड में फर्जी फसाये गये युवकों की माताएं कर रही थीं। सीमा सिंह (माता स्वाधीन सिंह उर्फ कृष्णा), रेखा मिश्रा (माता आलोक मिश्रा) एवं अनीता (माता रत्नेश गौतम) ने रोते हुये प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि उनके बेटों की हत्या न्यायिक हत्या की जा रही है और अब उन्हें न्याय मांगने से भी रोका जा रहा है। उनके साथ पूर्व प्रधान प्रमोद शुक्ला (खजुरन), संजय सिंह और सूरज गौतम जैसे स्थानीय नेताओं ने भी हुंकार भरी।
सड़क से सदन तक लड़ेंगे लड़ाई: अरविन्द
सोशल एक्टिविस्ट अरविंद पांडेय ने कहा कि प्रशासन का यह रवैया अलोकतांत्रिक है। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम की सूचना पहले ही दे दी गई थी लेकिन पुलिस ने जान—बूझकर इसे बाधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है और वे इसे सदन तक ले जायेंगे।
भारतीय हिंदू मित्र परिषद के अध्यक्ष और सोशल एक्टिविस्ट अरविंद पांडेय के नेतृत्व में बुधवार को विद्यावती रिसॉर्ट में 'जनता की अदालत' का भव्य आयोजन होना था। इसकी तैयारी पिछले कई दिनों से चल रही थी। हालांकि पुलिस प्रशासन ने कार्यक्रम शुरू होने से ऐन पहले रिसॉर्ट के लॉन में ताला जड़ दिया और आयोजन पर रोक लगा दी। पुलिस का तर्क था कि इस आयोजन के लिए प्रशासन से अग्रिम वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी। भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण रिसॉर्ट परिसर किसी छावनी जैसा नजर आने लगा।
कार्यक्रम रुकने से आक्रोशित पीड़ित पक्ष ने बदलापुर पुलिस के आला अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। परिजनों ने सीधे तौर पर बदलापुर कोतवाल शेषनाथ शुक्ला, एसओजी प्रभारी त्रिवेणी सिंह और सीओ बदलापुर पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगाये।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि "पुलिस के इन अधिकारियों ने विपक्षी पक्ष से मोटी रकम लेकर मामले की जांच को प्रभावित किया है और निर्दोष बच्चों को गलत तरीके से केस में फंसाया है। प्रशासन न्याय देने के बजाय हमारी आवाज दबाने में जुटा है।"
तहसील परिसर में घंटों चली नारेबाजी और प्रदर्शन के बाद एसडीएम बदलापुर ने पीड़ित पक्ष से मुलाकात की और उनका पक्ष सुना। स्वाधीन सिंह हत्याकाण्ड ने पहले ही बदलापुर की राजनीति को गरमा रखा था लेकिन आज पुलिस अधिकारियों पर लगे 'वसूली' के आरोपों ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।
तीन माताओं की चीख से गूंजी तहसील
रिसॉर्ट पर पाबंदी के बाद सैकड़ों की संख्या में लोग पैदल मार्च करते हुए बदलापुर तहसील पहुंचे। इस प्रदर्शन का नेतृत्व हत्याकांड में फर्जी फसाये गये युवकों की माताएं कर रही थीं। सीमा सिंह (माता स्वाधीन सिंह उर्फ कृष्णा), रेखा मिश्रा (माता आलोक मिश्रा) एवं अनीता (माता रत्नेश गौतम) ने रोते हुये प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि उनके बेटों की हत्या न्यायिक हत्या की जा रही है और अब उन्हें न्याय मांगने से भी रोका जा रहा है। उनके साथ पूर्व प्रधान प्रमोद शुक्ला (खजुरन), संजय सिंह और सूरज गौतम जैसे स्थानीय नेताओं ने भी हुंकार भरी।
सड़क से सदन तक लड़ेंगे लड़ाई: अरविन्द
सोशल एक्टिविस्ट अरविंद पांडेय ने कहा कि प्रशासन का यह रवैया अलोकतांत्रिक है। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम की सूचना पहले ही दे दी गई थी लेकिन पुलिस ने जान—बूझकर इसे बाधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है और वे इसे सदन तक ले जायेंगे।
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