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Jaunpur : पिता के वचन की खातिर त्यागा राज सिंहासन, भावुक हुआ पंडाल

टीम संचार सेतु

चन्दन अग्रहरि @ शाहगंज, जौनपुर। स्थानीय नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास श्री राजन जी महाराज ने श्रीराम के वनगमन का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्रभु श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा और माता की इच्छा पूर्ण करने के लिए राजसिंहासन का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। इस प्रसंग को सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथा के दौरान वनगमन, महर्षि वाल्मीकि से मिलन, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता तथा बालि वध का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास ने कहा कि श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा और कर्तव्य पालन का अद्भुत उदाहरण है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। लोक भाषा में गाए गए गीतों ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए और पूरा पंडाल 'जय श्रीराम' के उद्घोष से गूंज उठा।
अंत में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। नगर सहित आस—पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। आयोजक आनंद अग्रहरि, विशाल अग्रहरि, भुवनेश्वर मोदनवाल, कृष्णकांत सोनी, राम अवतार अग्रहरि, अश्वनी अग्रहरि, श्रीश मोदनवाल, सुनील अग्रहरि, विवेक सोनी, शीम प्रकाश अग्रहरि, बिट्टू किन्नर ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

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