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Jaunpur : ​इंसानियत के लिये दर्स देने का काम करेगी हुसैन की कुर्बानी: मौलाना अजादार

टीम संचार सेतु

संजय शुक्ला @ जौनपुर। जमीने मुबारक कदम रसूल छोटी लाइन इमाम बारगाह भंडारी स्टेशन के समीप हिंदू—मुस्लिम एकता के प्रतीक शिया पंजतनी कमेटी के तत्वावधान में 28वां ऑल इण्डिया मजलिसे अजा व जुलूस सम्पन्न हुआ। इस अजीमुश्शान मजलिस में मुजफ्फरनगर से आये मौलाना सैय्यद अजादार हुसैन ने कहा कि ईमाम हुसैन अ.स. की कर्बला के मैदान में दी गयी कुर्बानी रहती दुनिया तक न सिर्फ याद की जाती रहेगी, बल्कि इंसानियत के लिए दर्स देने का काम करती रहेगी। दुनिया में कुर्बानिया तो बहुत दी गयी लेकिन ऐसी कुर्बानी किसी भी धर्म के इतिहास में नहीं मिलती।
मौलाना इब्ने हसन ज़ैदी व मौलाना सैय्यद नामदार हुसैन दिल्ली ने कहा कि कर्बला के मैदान में बुजुर्ग से लेकर जवान और बच्चे तक के साथ इस हद तक बर्बता की गयी कि किसी भी सदी में जब यह दास्तां बयां की जायेगी तो जिस इंसान के सीने में दिल होगा उसकी आंखे जरुर छलक उठेंगी। मौलाना बाक़र मेंहदी अम्बेडकरनगर ने कहा कि इमाम हुसैन अ.स. के चाहने वालों को चाहिए कि उनके संदेश से ऐसी जागरुकता पैदा करें कि इंसान के दिलों की आंखे रोशन हो जाय। मजलिस का आगाज तिलावते कलाम-ए-पाक से कारी फ़ज़ल आज़मी  ने किया। सोजख्वानी सैय्यद गौहर अली ज़ैदी व हमनवां ने किया। पेशखानी डॉ शोहरत, हसन फतेहपुरी, वसी जौनपुरी, आबाद, खुमैनी आफाकी, डॉ मोहम्मद मेंहदी आज़ाद व मेंहदी जौनपुरी ने अपने कलाम पेश कर कर्बला के शहीदों को नजराने अकीदत पेश किया।
अलविदाई मजलिस मौलाना सैय्यद अजादार हुसैन ने पढ़ते हुये बताया कि इतिहास गवाह है कि हजरत मोहम्मद साहब व उनके नवासों ने अपना लहू देना गवारा समझा और इसके लिए सर कटाने से भी पीछे नहीं हटें। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत, अलम मुबारक व जुलजनाह निकाला गया जिसमें अंजुमन शमशीरे हैदरी नौहाख्वानी व मातम करती रही या हुसैन की सदा के साथ जुलूस अपने कदीम रास्ते से होता हुआ इमामबारगाह कदम रसूल में जाकर समाप्त हुआ। कमेटी की ओर से शाहिद मेंहदी, नेहाल हैदर, कैफ़ी रिज़वी, ऐजाज हुसैन, रूमी आब्दी, नियाज़ हुसैन, रियाज़ मोहसिन, पत्रकार हसनैन क़मर दीपू ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर डॉ क़मर अब्बास, शहंशाह आब्दी, आज़म ज़ैदी, नयाब हसन सोनू, समीर प्रधान बिस्वा, इज़हार हुसैन, कुमैल मेंहदी, असगर मेंहदी, शाकिर ज़ैदी सहित हज़ारों अजादार मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन बेलाल हसनैन व मौलाना शेख हसन जाफर ने संयुक्त रूप से किया।

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