जौनपुर। जिले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा 11 जुलाई 2017 को जारी पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज/नायलॉन/सिंथेटिक मांझे/तात धागा/प्लास्टिक धागा की बिक्री, भंडारण और उपयोग जारी है। इस जानलेवा धागे से मानव जीवन और पक्षी-पशुओं को लगातार खतरा बना हुआ है। हाल ही में 11 दिसंबर 2025 को शास्त्री पुल पर 40 वर्षीय निजी स्कूल शिक्षक संदीप तिवारी निवासी उमरपुर की मौत हो गई जब बेटी को स्कूल छोड़कर लौटते समय उनकी गर्दन में चाइनीज मांझा फंस गया और गहरी चोट लगने से अत्यधिक रक्तस्राव हो गया। पुलिस ने इसकी पुष्टि की है और स्थानीय लोगों ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस गंभीर स्थिति पर दो अधिवक्ताओं ने मजबूत कानूनी कदम उठाए हैं। अधिवक्ता विकास तिवारी दीवानी न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 की धारा 30(1) के तहत जिला प्रशासन को 60 दिनों की पूर्व कानूनी नोटिस भेजा है। यह धारा अधिनियम के तहत अपराधों की संज्ञान लेने की प्रक्रिया से संबंधित है जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध की संज्ञान तब तक नहीं ले सकता जब तक कि शिकायत केंद्र सरकार या उसके द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा या किसी व्यक्ति द्वारा कम से कम 60 दिनों की पूर्व सूचना देकर नहीं की जाती।अधिवक्ता विकास तिवारी ने इसी प्रावधान का उपयोग करते हुये जिलाधिकारी—पुलिस अधीक्षक जौनपुर तथा क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाराणसी को नोटिस भेजा है। आरोप है कि पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी ड्यूटी में लापरवाह हैं, मांझा निर्माण-बिक्री जारी है और जिलाधिकारी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। यदि 60 दिनों में उचित जांच, छापेमारी, जब्ती और अभियोजन नहीं हुआ तो वे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट जौनपुर में अज्ञात उल्लंघनकर्ताओं सहित पुलिस अधीक्षक जौनपुर और क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ शिकायत दाखिल करेंगे। उल्लंघन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 तथा भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत दंडनीय है।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अधिवक्ता अतुल सिंह ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 19 के तहत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार को 60 दिनों की पूर्व सूचना भेजी है। उन्होंने जौनपुर के विभिन्न बाजारों में प्रतिबंधित मांझे की उपलब्धता की पुष्टि की है। यदि 60 दिनों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे सक्षम मजिस्ट्रेट कोर्ट में अज्ञात/ज्ञात विक्रेताओं, भंडारकों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ निजी शिकायत दाखिल करेंगे।
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