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Jaunpur : ​टेट अनिवार्यता का आदेश प्राकृतिक न्याय सिद्धांत के खिलाफ : प्रमोद तिवारी

टीम संचार सेतु

जौनपुर। 1 सितम्बर 2025 को उच्चतम न्यायालय के आदेश को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री अमित सिंह के नेतृत्व में शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य सभा में उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी से प्रयागराज स्थित उनके आवास पर मिलकर विगत शीतकालीन सत्र में शिक्षकों के पक्ष में जोरदार आवाज़ उठाने के लिए देश-प्रदेश के लाखों शिक्षकों की तरफ से धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित करते हुए शिक्षकों के अस्तित्व के रक्षा के लिए आपके लंबे राजनैतिक व विधिक अनुभव का मार्गदर्शन प्राप्त कर आगामी बजट सत्र में शिक्षकों के पक्ष में आरटीई एक्ट में संसोधन करने के लिए विधायी उपाय पर विस्तृत चर्चा करते हुए सहयोग के लिए ज्ञापन दिया।
राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट कहा कि टेट अनिवार्यता का आदेश प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। कोई भी कानून जब बनता है तब से लागू होता है न कि उसके पूर्व से लागू किया जाता है यह पूरी तरह से अन्यायपूर्ण एवं अव्यवहारिक है। इन शिक्षकों की भर्ती तत्कालीन अहर्ताओं के आधार पर हुई है ये तत्कालीन विज्ञापन की निहित सेवा शर्तों/पात्रता को पूरा करते हुए शिक्षक के रूप में चयनित होकर 20-25 वर्षों से सेवा दे रहे हैं इनके ऊपर आज की चयन/पात्रता को पूरा करने का कानून थोपना गलत है। इस आधार पर क्या सिविल सेवा, स्वास्थ्य सेवा या न्यायायिक सेवा अथवा किसी भी दूसरे विभाग में पूर्व में चयनित कार्मिकों को आज की सेवा शर्तों/पात्रता परीक्षा को पुनः पास करने के लिए उन्हें बाध्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए हम लोग पूरी गम्भीरता से लगे हैं और आगामी बजट सत्र में इसके सम्बंध में विधायी विकल्प को लेकर जिम्मेदार लोगों व सदन के सदस्यों के साथ सार्थक प्रयास करेंगे और जब तक इस कानून में संसोधन नहीं होता एवं शिक्षकों की सेवा सुरक्षित होना सुनिश्चित नहीं होता तब तक हम इनके साथ खड़े रहेंगे। इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष राजेश सिंह टोनी, जिला उपाध्यक्ष संतोष सिंह बघेल, जिला अध्यक्ष प्रयागराज अखिलेश द्विवेदी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज तिवारी, संगठन मंत्री सतीश तिवारी उपस्थित रहे।

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