Jaunpur News : धौरइल में गूंजी भागवत कथा की अमृत धारा, श्रद्धा में डूबा पूरा गांव

सरायख्वाजा, जौनपुर। स्थानीय थाना क्षेत्र के धौरइल गांव स्थित श्रीनाथ सिंह के आवास पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन एवं भंडारे के साथ हुआ। समापन पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा गांव भक्ति के माहौल में डूब गया।
जानकारी के अनुसार 7 दिनों से चल रही इस कथा में प्रसिद्ध कथा वाचक डॉ. अखिलेश चंद्र पाठक ने अपनी वाणी से भक्ति, ज्ञान और धर्म की अमृतवर्षा किया। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन लीला, मीरा बाई की भक्ति, प्रह्लाद चरित्र तथा कलियुग में नामजप की महिमा जैसे प्रसंगों का हृदयस्पर्शी वर्णन किया। उनके प्रवचनों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और कथा स्थल पर हर दिन सैकड़ों की संख्या में भक्त उमड़ते रहे।
समापन दिवस पर वैदिक मंत्रों के साथ हवन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति डालकर विश्व कल्याण और शांति की कामना किया। इसके पश्चात भंडारे का आयोजन हुआ जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा के अंत में कथा वाचक डॉ. अखिलेश चंद्र पाठक का अंगवस्त्र व माल्यार्पण करके सम्मान किया गया। डॉ. पाठक ने कहा कि "श्रीमद भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह आत्मिक जागरण और मानवता की साधना है। इससे व्यक्ति के भीतर सद्भाव, करुणा और भक्ति का भाव जागृत होता है।"
ग्रामीणों ने आयोजन समिति के सभी सदस्यों की प्रशंसा करते हुये कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता, प्रेम और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देते हैं। पूरे 7 दिनों तक गांव में भक्ति संगीत, हरिनाम संकीर्तन और पुष्पवर्षा का मनमोहक दृश्य देखने को मिला।
इस अवसर पर हरीनाथ सिंह, श्रीनाथ सिंह, अलोक सिंह, मनोज सिंह, राजनाथ सिंह, भगवान प्रशाद, राम प्रसाद, शिव प्रसाद सहित गांव के युवाओं और महिलाओं का सराहनीय योगदान रहा। सभी ने मिलकर कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
डॉ. अखिलेश चंद्र पाठक कई वर्षों से देश भर में श्रीमद्भागवत कथा वाचन कर रहे हैं। उनकी कथा शैली भावपूर्ण, ओजस्वी और शास्त्रीय ज्ञान से परिपूर्ण मानी जाती है। वे भक्ति के साथ सामाजिक चेतना के संदेश भी कथा के माध्यम से देते हैं। कथा समापन पर आयोजित भंडारे में गांव सहित आस—पास के क्षेत्रों के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने प्रसाद ग्रहण कर आनंद और शांति की अनुभूति की। पूरा वातावरण "हरे कृष्णा...हरे राम" के जयघोष से गूंजता रहा।

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