Jaunpur News : ​ ​आज की युवा पीढ़ी में संक्रमण की तरफ फैल रहा है तनाव: सीमा

सरायख्वाजा, जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय में व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग एवं वेलनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में संकाय भवन के कांफ्रेंस हाल में  विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के दूसरे दिन तनाव प्रबंधन कार्यशाला एवं काउंसलिंग कैंप "सुनना और समझना" का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने जीवन  में तनाव मुक्त रहने के टिप्स भी दिये विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह की थीम "आत्महत्या के विषय पर दृष्टिकोण और संवाद को बदलना" है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता जिला महिला अस्पताल की काउंसलर सीमा सिंह ने कहा कि एचआईवी पीड़ितों में आत्महत्या की प्रवृत्ति आजकल बहुत अधिक देखने को मिल रही है। इसके बचाव के लिए उनकी निरंतर काउंसलिंग की जा रही है, ताकि उनकी सोच में परिवर्तन लाया सके। पीड़ितों को काउंसलिंग के दौरान खुश रहने की भी टिप्स दिए जाते हैं और उसके सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। एक शोध का हवाला देते हुए कहा कि 40 प्रतिशत लोगों के जीवन में कभी न कभी एक बार आत्महत्या करने का विचार जरूर आता है। आज की युवा पीढ़ी में तनाव संक्रमण की तरफ फैल रहा है जिसका मुख्य कारण परिवार और समाज में पारंपरिक संस्कारों के प्रवाह का विकृत रूप होना है।
अनुप्रयुक्त सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. मनोज मिश्र ने विद्यार्थियों से श्री रामचरित मानस के विभिन्न संदर्भों की याद दिलाते हुए जीवन में  सकारात्मकता लाने की सलाह देते हुये कहा कि यह देश युवाओं का है और विकसित भारत तब और बुलंदी पर होगा जब हमारे युवा सकारात्मकता एवं प्रसन्नता से परिपूर्ण होंगे।
नोडल अधिकारी प्रो. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि आजकल युवाओं में विभिन्न कारणों से तनाव तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। पारिवारिक समस्याएं, आपसी संबंधों में दरार, परीक्षा परिणाम का दबाव और बढ़ती प्रतिस्पर्धा उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। केवल विद्यार्थी ही नहीं, आम आदमी भी आर्थिक समस्याओं और रोजमर्रा की जटिलताओं के कारण तनावग्रस्त होता जा रहा है। संदेश दिया कि सकारात्मक सोच कभी नकारात्मकता से हारती नहीं है। कार्यक्रम का संचालन व्यवहारिक मनोविज्ञान विभाग की शिक्षिका एवं परामर्श केंद्र की प्रभारी डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर डॉ. अन्नू त्यागी, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, ज्योति सिंह, सविता सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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